संभल में दुल्हन पक्ष का आरोप—कार की मांग पूरी नहीं होने पर दूल्हा बारात लेकर नहीं पहुंचा, 3,000 मेहमानों के भोजन की व्यवस्था और शादी का सामान रह गया तैयार
मोहम्मद शफी आलम, संभल । शादी का घर था, मेहमानों के स्वागत की तैयारियां थीं, दुल्हन के हाथों में मेहंदी लगी थी और परिवार को बारात आने का इंतजार था। लेकिन दुल्हन पक्ष के मुताबिक, तय समय पर बारात नहीं पहुंची। आरोप है कि दहेज में स्कॉर्पियो गाड़ी की मांग पूरी न होने पर दूल्हा पक्ष ने शादी से पहले ही किनारा कर लिया। संभल के परयावली गांव से सामने आए इस मामले ने दहेज प्रथा को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शादी के लिए करीब 3,000 लोगों के भोजन की व्यवस्था की थी
दुल्हन पक्ष के अनुसार, दोनों का रिश्ता करीब दो साल पहले तय हुआ था और लड़का-लड़की एक-दूसरे को पसंद करते थे। 11 अक्टूबर को बारात आनी थी। परिवार ने शादी के लिए करीब 3,000 लोगों के भोजन की व्यवस्था की थी। उनका दावा है कि शादी की तैयारियों पर 20 लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए थे। कपड़े, बर्तन और अन्य सामान भी जुटा लिया गया था तथा पांच लाख रुपये नकद देने की तैयारी थी।
आरोप—स्कॉर्पियो की मांग पूरी नहीं हुई तो नहीं आई बारात
परिवार का आरोप है कि शादी के ऐन मौके पर दूल्हे पक्ष ने स्कॉर्पियो गाड़ी की मांग रख दी। दुल्हन पक्ष ने यह मांग पूरी करने से इनकार किया तो 11 अक्टूबर को बारात नहीं पहुंची। इससे शादी की तैयारियां धरी रह गईं और परिवार को सामाजिक व भावनात्मक आघात पहुंचा।
दहेज-विरोधी पंचायतों के फैसले पर भी सवाल
दुल्हन पक्ष ने क्षेत्र में तुर्क बिरादरी के 56 गांवों की पंचायतों द्वारा दहेज न लेने-देने के फैसले का भी जिक्र किया। परिवार का कहना है कि ऐसे संकल्पों के बावजूद दहेज की मांग के आरोप सामने आना चिंता का विषय है।
पुलिस से शिकायत, कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं
पीड़ित परिवार के मुताबिक, मामले की शिकायत संभल पुलिस को दी गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई या आरोपों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। अब मामले में पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
दहेज के नाम पर शादी रोकने या बारात न लाने के आरोप सिर्फ एक परिवार की खुशियों को प्रभावित नहीं करते, बल्कि समाज में दहेज-विरोधी प्रयासों की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाते हैं। आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
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