विपक्षी सांसदों के प्रस्तावित मार्च से पहले दिल्ली पहुंचे सपा प्रमुख, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
नई दिल्ली। चुनाव आयोग के खिलाफ इंडी गठबंधन के सांसदों के प्रस्तावित विरोध मार्च से पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव दिल्ली पहुंच गए। यहां उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि आयोग निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहा है और उसकी कार्यशैली भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में जाती हुई दिखाई देती है।
अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि चुनाव आयोग को लेकर शिकायतें और आपत्तियां कोई नई बात नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के रवैये को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि वह केवल भाजपा के सदस्यों को ही भारतीय नागरिक और वोट देने का अधिकार रखने वाला मान रहा है।
भाजपा पर धनबल के इस्तेमाल का आरोप
सपा प्रमुख ने भाजपा पर चुनावों में धनबल और संसाधनों के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोग लंबे समय से भाजपा को एक ऐसी चुनावी मशीन के तौर पर देखते रहे हैं, जिसके पास चुनाव लड़ने के लिए बड़ी मात्रा में धन और संसाधन उपलब्ध हैं।
अखिलेश ने दावा किया कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद चुनाव आयोग के कामकाज में बदलाव देखने को मिला है। उनके मुताबिक, आयोग का रवैया पहले की तुलना में बदला हुआ दिखाई देता है और वह भाजपा के लिए काम करता हुआ नजर आ रहा है।
कुंदरकी-मीरापुर से अयोध्या तक उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के कुंदरकी और मीरापुर विधानसभा चुनावों में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने अयोध्या और अंबेडकर नगर में हुए उपचुनावों को लेकर भी सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी संविधान के मुताबिक निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराना है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और आयोग को इन शिकायतों का जवाब देना चाहिए।
पश्चिम बंगाल में बूथ कब्जे का भी दावा
सपा प्रमुख ने पश्चिम बंगाल के चुनावों का जिक्र करते हुए बूथ कब्जाने के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि वहां फोर्स के जरिए बूथों पर कब्जे की घटनाएं सामने आईं। अखिलेश ने कहा कि इस तरह की स्थिति केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रही, बल्कि उत्तर प्रदेश में भी पहले ऐसी घटनाएं देखने को मिली हैं।
‘एक देश, एक चुनाव’ पर भी निशाना
अखिलेश यादव ने केंद्र के ‘एक देश, एक चुनाव’ प्रस्ताव पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इसे केवल प्रशासनिक सुविधा बढ़ाने की व्यवस्था के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, इसके पीछे चुनावी व्यवस्था को प्रभावित करने की रणनीति होने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि अगर चुनावी व्यवस्था में एक बार कथित तौर पर धांधली कर दी जाए और उसके बाद लंबे समय तक चुनावी प्रक्रिया की जांच-पड़ताल की जरूरत न पड़े, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा। अखिलेश ने कहा कि देश की जनता इस तरह की व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेगी।
कल्याण बनर्जी ने सीईसी के इस्तीफे की मांग की
वहीं, तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर तीखी टिप्पणी की। विपक्षी प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे बनर्जी ने उन्हें ‘वोट चोर’ कहे जाने का जिक्र करते हुए इस्तीफा देने की मांग की।
कल्याण बनर्जी ने चुनाव आयोग पर कथित ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल में भी कथित अनियमितताओं के जरिए चुनाव जीते। हालांकि ये आरोप विपक्षी नेताओं के राजनीतिक दावे हैं।
लद्दाख सांसद मार्च से रहेंगे दूर
इंडी गठबंधन के प्रस्तावित मार्च से लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा ने खुद को अलग रखा है। उन्होंने कहा कि वह दिल्ली में एक बैठक के सिलसिले में आए हैं और उनकी केंद्रीय गृह मंत्री के साथ बैठक निर्धारित है। इसके बाद उन्हें लद्दाख लौटना है। इसी वजह से वह चुनाव आयोग के खिलाफ प्रस्तावित मार्च में शामिल नहीं हो पाएंगे।
विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। प्रस्तावित मार्च के जरिए विपक्ष इन मुद्दों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराने की तैयारी में है।
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