राहुल गांधी का आरोप- एसआईआर से हटाए गए 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम; 2024 के लोकसभा चुनाव की वैधता पर भी उठाए सवाल, 19 दलों के 215 सांसद हुए शामिल
नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी इंडी गठबंधन ने शनिवार को प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ की कार्यवाही करते हुए छह आरोपों वाला प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया। कांग्रेस के नेतृत्व में आयोजित इस राजनीतिक कार्यक्रम में 19 विपक्षी दलों के 215 सांसद शामिल हुए। इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाते हुए वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव की वैधता पर भी सवाल खड़े किए।
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के 10 राजाजी मार्ग स्थित आवास पर आयोजित यह कार्यवाही तीन घंटे 23 मिनट तक चली। इसकी अध्यक्षता लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। संसद की कार्यवाही की तर्ज पर आयोजित इस मॉक संसद में खरगे ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ छह आरोपों वाला प्रस्ताव पेश किया, जिसे उपस्थित सांसदों ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया।
राहुल बोले- हर सात में से एक मतदाता का नाम हटाया गया
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में दावा किया कि एसआईआर के माध्यम से हटाए गए 13.3 करोड़ मतदाता देश के कुल मतदाताओं का करीब 15 प्रतिशत हैं। यानी हर सात मतदाताओं में से एक का नाम सूची से हटाया गया है। उन्होंने कहा कि इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान किया था।
राहुल गांधी ने कहा कि 2024 के चुनाव में कई सीटों पर जीत का अंतर महज तीन प्रतिशत था। ऐसे में सवाल उठता है कि जिन लोगों ने उस चुनाव में मतदान किया था, उनके नाम अब मतदाता सूची से हटाए जाने का क्या मतलब है? क्या निर्वाचन आयोग अप्रत्यक्ष रूप से उस चुनाव की वैधता पर ही सवाल खड़ा कर रहा है?
उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की थी। राहुल ने कहा कि विपक्ष के पास उनकी भूमिका को लेकर पर्याप्त साक्ष्य हैं और वह मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद पर बने नहीं रह पाएंगे।
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष को मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ इस तरह बगीचे में बैठकर कार्यवाही करनी पड़ रही है, क्योंकि उसके लिए सभी संस्थानों के दरवाजे बंद कर दिए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि संवैधानिक संस्था की आड़ में कोई भी व्यक्ति हमेशा जवाबदेही से बच नहीं सकता। एक दिन उसे देश के लोगों के प्रतिनिधियों के सामने जवाब देना होगा।
खरगे का आरोप- मोदी और शाह के निर्देश पर चल रहा आयोग
मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रस्ताव पेश करते हुए आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सीधे निर्देश पर निर्वाचन आयोग चला रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष की लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और स्वतंत्रता को लेकर है।
खरगे ने कहा कि आयोग को संविधान की भावना के अनुरूप काम करना चाहिए, ताकि आम नागरिकों का भरोसा लोकतांत्रिक व्यवस्था में बना रहे। कमजोर वर्गों, महिलाओं और युवाओं के मतदान के अधिकार को किसी अधिकारी द्वारा कंप्यूटर के जरिये चुपचाप मतदाता सूची से नाम हटाकर प्रभावित नहीं किया जा सकता।
उन्होंने दावा किया कि करीब सात महीने पहले विपक्ष के 193 सांसदों ने संसद के दोनों सदनों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने के लिए नोटिस दिए थे, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। खरगे ने आरोप लगाया कि बिहार में एसआईआर के जरिये वोट चोरी का प्रयोग किया गया और बाद में इसे भाजपा विरोधी मतदाताओं के नाम हटाने के लिए देशभर में लागू किया गया।
प्रस्ताव में छह गंभीर आरोप, कानूनी सुरक्षा खत्म करने की मांग
इंडी गठबंधन की ओर से पारित प्रस्ताव में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ छह प्रमुख आरोप लगाए गए। इनमें चुनाव में कथित हेरफेर की साजिश में शामिल होने, एसआईआर के तहत 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटवाने, संसद की निगरानी के बिना मतदाता पंजीकरण के फॉर्म-6 में बदलाव करने और ईआरओनेट तथा ईसीआईनेट के जरिये मतदाता सूचियों पर नियंत्रण केंद्रीकृत करने के आरोप शामिल हैं।
इसके अलावा अन्य दो निर्वाचन आयुक्तों को निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखने तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर काम करने का भी आरोप लगाया गया। प्रस्ताव में दावा किया गया कि दोनों अन्य निर्वाचन आयुक्तों को निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखा गया और उन्हें आधिकारिक रिकॉर्ड में कम से कम 14 आपत्तियां दर्ज करानी पड़ीं।
विपक्ष ने दिसंबर 2023 में पारित मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और कार्यकाल से संबंधित कानून के तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त को मिली कानूनी सुरक्षा समाप्त करने, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और न्यायालय में मुकदमा चलाने की मांग भी की।
विपक्षी नेताओं ने भी निर्वाचन आयोग पर लगाए आरोप
कार्यक्रम में मीरा कुमार ने कहा कि देश के करोड़ों लोगों के नाम अनुचित तरीके से मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं और इस संबंध में सवाल उठाने पर जवाबदेही तय नहीं की जा रही है। इसी वजह से विपक्ष ने जन महाभियोग की प्रतीकात्मक कार्यवाही का फैसला किया।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के राज्यसभा सदस्य बैद्यनाथ राम ने एसआईआर को वोट चोरी का माध्यम बताते हुए लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह बताया। जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद नासिर असलम ने कहा कि निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक के मताधिकार की रक्षा करना और सभी राजनीतिक दलों के साथ समान व्यवहार करना है।
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से हटाए गए नामों में 71 प्रतिशत मुस्लिम और 51 प्रतिशत महिलाएं हैं। वहीं, सांसद सागरिका घोष ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल का 2026 विधानसभा चुनाव चोरी किया गया और मतदाता सूची से नाम हटाने के मामले में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने केंद्र सरकार के साथ मिलीभगत की। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद पी. संतोष कुमार ने भी निर्वाचन आयुक्तों से पद छोड़ने की मांग की।
मतदाता सूची से नाम कटने की शिकायत लेकर पहुंचे लोग
कार्यक्रम में ऐसे कुछ लोग भी पहुंचे, जिन्होंने मतदाता सूची से अपने या परिजनों के नाम हटाए जाने की शिकायत की। दिल्ली के मंगोलपुरी निवासी कांता प्रसाद ने दावा किया कि वह जीवित हैं, लेकिन मतदाता सूची में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि वह पिछले 35 वर्षों से मतदान करते आ रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के इफ्तिकार ने कहा कि उनके पिता 50 वर्षों से मतदान करते रहे हैं। उनके पास पहचान और शैक्षणिक दस्तावेज भी हैं, इसके बावजूद मतदाता सूची से उनका नाम हटा दिया गया। दिल्ली की अनीता जायसवाल ने बताया कि वह दिहाड़ी मजदूर और अकेली मां हैं। मतदाता सूची से नाम कटने के बाद उन्हें अपनी बेटी की पढ़ाई और छात्रवृत्ति को लेकर चिंता सता रही है।
रविवार को रामलीला मैदान में होगी विपक्ष की रैली
गौरतलब है कि इंडी गठबंधन की यह जन महाभियोग कार्यवाही प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्यक्रम था। इसमें पारित प्रस्ताव मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है और इससे वह स्वत: पदमुक्त नहीं होते। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिए संविधान में निर्धारित संसदीय प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।
इस बीच, इंडी गठबंधन रविवार, 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एसआईआर में कथित अनियमितताओं के विरोध में बड़ी रैली करेगा। कांग्रेस ने इस रैली में 10 लाख लोगों के शामिल होने की तैयारी का दावा किया है। विपक्षी दल इस दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाएंगे।
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