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जेल से बाहर आते ही आजम खां को ईडी ने लिया हिरासत में, गाजियाबाद कोर्ट में होगी पेशी

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जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े धनशोधन मामले में कार्रवाई, बेटे अब्दुल्ला आजम को पैनकार्ड मामले में मिली जमानत के बाद रिहाई

रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खां की शनिवार को रामपुर जिला जेल से रिहाई के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें हिरासत में ले लिया। जेल से बाहर निकलते ही ईडी की टीम उन्हें अपने साथ ले गई। इस दौरान जेल परिसर के बाहर काफी देर तक गहमागहमी बनी रही। आजम खां को ईडी के साथ जाते देख सपा समर्थकों ने विरोध जताते हुए नारेबाजी की। वहीं, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम रिहा होने के बाद घर के लिए रवाना हो गए।

आजम खां और अब्दुल्ला आजम को दो पैनकार्ड रखने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। अदालत ने 29 अक्टूबर को दोनों की जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए उनकी सजा निलंबित कर दी थी। इसके बाद शुक्रवार को जमानत की औपचारिकताएं पूरी की गईं और संबंधित अदालत से रिहाई परवाने जारी हुए। शनिवार को दोनों की जेल से रिहाई हुई।

आजम खां की रिहाई की सूचना मिलने के बाद सुबह से ही जेल के बाहर समर्थकों और परिचितों की भीड़ जुटने लगी थी। भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस बल भी बुलाया गया था। इसी बीच आजम खां की रिहाई से कुछ देर पहले ईडी की टीम भी पुलिस बल के साथ जेल पहुंच गई।

जेल से बाहर आने के बाद ईडी अधिकारियों ने आजम खां को अपने साथ चलने के लिए कहा। इस दौरान उनके और अधिकारियों के बीच कुछ देर बातचीत हुई। इसके बाद ईडी की टीम उन्हें अपने साथ लेकर रवाना हो गई। अचानक हुए इस घटनाक्रम से जेल के बाहर मौजूद समर्थकों में नाराजगी फैल गई। सपा कार्यकर्ताओं ने ईडी की कार्रवाई के विरोध में नारेबाजी की। हालांकि, पुलिसकर्मी मौके पर व्यवस्था संभालने में जुटे रहे।

ईडी की यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े धनशोधन के मामले में बताई गई है। इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, आजम खां को गिरफ्तार करने की प्रक्रिया पूरी करने के बाद गाजियाबाद स्थित धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। उनकी पेशी एक नवंबर को प्रस्तावित है।

दो पैनकार्ड मामले में हाईकोर्ट ने निलंबित की थी सजा

आजम खां और अब्दुल्ला आजम को दो पैनकार्ड रखने के मामले में निचली अदालत ने दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। दोनों ने इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी ओर से सजा निलंबित करने, जमानत देने और दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने 29 अक्टूबर को सुनवाई के बाद दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत मंजूर कर ली थी। हालांकि, अदालत ने दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की। यानी निचली अदालत का दोषसिद्धि संबंधी आदेश फिलहाल बरकरार है और आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाओं पर अंतिम फैसला आना बाकी है।

अभियोजन के अनुसार, मामला अलग-अलग जन्मतिथियों के आधार पर दूसरा पैनकार्ड बनवाने और उसके कथित इस्तेमाल से जुड़ा है। आरोपों में चुनावी नामांकन पत्रों में दूसरे पैनकार्ड के इस्तेमाल का मामला भी शामिल है। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद दोनों की रिहाई का रास्ता साफ हुआ था, लेकिन जेल से बाहर आते ही आजम खां को ईडी की कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

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