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शिवा शर्मा मौत केस में बड़ा मोड़! श्रद्धा दुबे समेत तीन लखनऊ लाए गए

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नागपुर से गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ की कार्रवाई तेज, चार मोबाइल फोन के डेटा से तलाशे जाएंगे फरारी के राज और कथित मददगार

लखनऊ। व्यापारी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच तेज हो गई है। मामले में चर्चा में आई श्रद्धा दुबे को लेकर विशेष कार्यबल (एसटीएफ) लखनऊ पहुंच गया है। जानकारी के मुताबिक, एसटीएफ रश्मि और दानिश को भी लखनऊ लेकर आई है। तीनों का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद अदालत में पेश किए जाने की तैयारी है। श्रद्धा दुबे को नागपुर से गिरफ्तार किया गया था। अब जांच एजेंसियों की नजर आरोपियों के संपर्कों, फरारी के दौरान मिली कथित मदद और उन्हें संरक्षण देने वालों पर टिकी है।

चार मोबाइल फोन खोल सकते हैं बड़े राज

जांच में सबसे अहम कड़ी आरोपियों के पास से मिले चार मोबाइल फोन बताए जा रहे हैं। पुलिस इनके डेटा की पड़ताल करेगी। मोबाइल में मौजूद चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल जानकारियों से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि फरारी के दौरान आरोपियों ने किन लोगों से संपर्क किया और उन्हें किस-किस से मदद मिली।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपियों को ठहरने, छिपने या फरारी के दौरान दूसरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में किसी ने भूमिका निभाई थी या नहीं। डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से मामले में नए सुराग मिलने की उम्मीद है।

नागपुर में कथित संरक्षण की भी जांच

जांच के दौरान श्रद्धा दुबे को नागपुर में कथित तौर पर संरक्षण मिलने और एक फार्म हाउस में ठहराए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जुल्फिकार बेहलिम और मोहसिन समेत कथित वसूली गिरोह के कुछ सदस्यों पर उसे संरक्षण देने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इस गिरोह पर कारोबारियों से रंगदारी मांगने और धमकाने के आरोप भी बताए जा रहे हैं।

हालांकि, श्रद्धा दुबे को संरक्षण देने और इन लोगों की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। जांच एजेंसियां तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर इन पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।

कथित ‘जेड गैंग’ से संबंधों की आशंका

जांच के दौरान श्रद्धा दुबे के नागपुर के कथित ‘जेड गैंग’ से संबंध होने की आशंका भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि अगस्त में संबंधित गिरोह के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत कार्रवाई की गई थी। गिरोह के तार मादक पदार्थों और सोने की तस्करी से जुड़े होने के दावे भी किए जा रहे हैं।

फिलहाल, कथित गैंग से श्रद्धा के संबंधों और उसे संरक्षण मिलने की बातों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन पहलुओं को जांच के दायरे में शामिल आरोपों और आशंकाओं के तौर पर ही देखा जा रहा है।

अब जांच के दायरे में संभावित मददगार

एसटीएफ अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फरारी के दौरान आरोपियों की मदद किसने की और क्या किसी अन्य व्यक्ति की भी इस मामले में भूमिका रही है। मोबाइल फोन के डेटा, कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद आरोपियों के संपर्कों की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।

व्यापारी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत से जुड़े इस मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ कई अहम सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है। हालांकि, कथित मददगारों और गिरोह से जुड़े आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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