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शिवा शर्मा केस में बड़ा एक्शन: श्रद्धा दुबे समेत तीन इनामी गिरफ्तार

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लखनऊ पुलिस और यूपी एसटीएफ ने नागपुर पुलिस की मदद से तीनों को पकड़ा; हत्या के मामले में ₹50-50 हजार का था इनाम

आगरा के होटल के सीसीटीवी और पुलिस अधिकारियों के फेरबदल को लेकर भी रहा था मामला चर्चा में

लखनऊ। कारोबारी शिवा शर्मा की मौत के मामले में फरार चल रहे तीन इनामी आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच ने नया मोड़ ले लिया है। लखनऊ पुलिस और उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की संयुक्त टीम ने नागपुर पुलिस के सहयोग से मॉडल श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और चालक दानिश को नागपुर से गिरफ्तार कर लिया। तीनों पर पुलिस ने ₹50-50 हजार का इनाम घोषित किया था। पुलिस के मुताबिक, आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपियों को लखनऊ लाया जा रहा है। अब इस मामले में आरोपियों से पूछताछ और आगे की जांच पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

यह मामला उस समय से चर्चा में है, जब कारोबारी शिवा शर्मा की मौत के बाद श्रद्धा दुबे और दो अन्य आरोपी फरार बताए गए थे। उनकी तलाश के बीच पुलिस की कार्रवाई, श्रद्धा से जुड़े कथित हाईप्रोफाइल संपर्कों की चर्चाओं और आगरा के एक होटल में उसके ठहरने से संबंधित मीडिया रिपोर्टों ने मामले को सुर्खियों में बनाए रखा।

9 अक्टूबर को दर्ज हुआ था मुकदमा

पुलिस के अनुसार, 9 अक्टूबर 2026 को वादिनी रंजना शर्मा की लिखित तहरीर के आधार पर लखनऊ के हजरतगंज थाने में मुकदमा संख्या 216/2026 दर्ज किया गया था। इसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया। इसी मामले में श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और चालक दानिश फरार चल रहे थे।

पुलिस ने तीनों की गिरफ्तारी के लिए ₹50-50 हजार का इनाम घोषित किया था। उनकी तलाश के बीच लखनऊ पुलिस और यूपी एसटीएफ ने संयुक्त अभियान चलाया। 20 अक्टूबर को नागपुर पुलिस के सहयोग से तीनों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई।

अब जांच के दौरान पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर मामले से जुड़े घटनाक्रम, उपलब्ध साक्ष्यों और उनकी कथित भूमिका के संबंध में जानकारी जुटाएगी। हालांकि, गिरफ्तारी के बाद सामने आने वाले तथ्यों और पुलिस की आधिकारिक जांच के आधार पर ही मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

आगरा के होटल में ठहरने की रिपोर्ट भी आई थी सामने

श्रद्धा दुबे की तलाश के दौरान आगरा के ताज नगरी फेज-1 स्थित ओम पैलेस होटल में उसके कथित रूप से ठहरने की खबर भी सामने आई थी। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि श्रद्धा होटल में करीब 24 घंटे तक रुकी थी और वहां के सीसीटीवी फुटेज से जुड़ी जानकारी सामने आई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 17 अक्टूबर की सुबह 6 बजकर 33 मिनट पर श्रद्धा से जुड़ी बताई गई एक गाड़ी होटल पहुंची थी। इसके करीब 20 मिनट बाद, सुबह 6 बजकर 53 मिनट पर श्रद्धा के होटल में दाखिल होने का दावा किया गया। गाड़ी का नंबर यूपी 32 आरटी 8043 बताया गया था।

हालांकि, होटल में ठहरने और सीसीटीवी फुटेज से जुड़े इन विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती। इन तथ्यों की जांच में क्या भूमिका है, यह पुलिस की आधिकारिक जांच और सामने आने वाले साक्ष्यों से ही स्पष्ट होगा।

श्रद्धा ने फरारी के दौरान दी थी सफाई

गिरफ्तारी से पहले श्रद्धा दुबे ने बातचीत में शिवा शर्मा की मौत को हत्या के बजाय आत्महत्या बताया था। उसने दावा किया था कि शिवा कर्ज में डूबा हुआ था और उसकी मौत के लिए यही स्थिति जिम्मेदार थी। श्रद्धा ने मामले में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार करते हुए सीसीटीवी फुटेज की जांच कराने की मांग की थी।

श्रद्धा के मुताबिक, शिवा शर्मा करीब दो महीने पहले उसके घर पर रहने आया था। उसने यह भी कहा था कि इस दौरान उसके घर से आभूषण चोरी होने की बात सामने आई थी, लेकिन उसने इसे बहुत बड़ी घटना नहीं बताया। उसका दावा था कि सीसीटीवी फुटेज की जांच से घटनाक्रम स्पष्ट हो सकता है।

ये श्रद्धा की ओर से किए गए दावे हैं। इनकी पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही होगी। दूसरी ओर, पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की और फरार आरोपियों की तलाश की। अब तीनों की गिरफ्तारी के बाद उनके बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान जांच का अहम हिस्सा हो सकता है।

अखिलेश यादव के बयान से भी गरमाया था मामला

शिवा शर्मा प्रकरण को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सरकार पर सवाल उठाए थे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने कहा था कि यह सामान्य मामला नहीं है और यह सरकार को ले डूबेगा। इस बयान के बाद मामला राजनीतिक चर्चा में भी आया।

फरारी के दौरान श्रद्धा दुबे का एक वीडियो सामने आने की बात भी कही गई थी, जिसमें उसने अपना नाम नामचीन और रसूखदार लोगों से जोड़ने पर आपत्ति जताई थी। इससे पहले शिवा शर्मा को कथित तौर पर धमकाने से संबंधित एक ऑडियो के वायरल होने की भी चर्चा रही थी। हालांकि, इन दावों और ऑडियो की प्रामाणिकता के संबंध में निष्कर्ष निकालने के लिए जांच और आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

गिरफ्तारी से पहले पुलिस विभाग में हुए थे बदलाव

श्रद्धा दुबे और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने के बीच लखनऊ पुलिस विभाग में कई प्रशासनिक बदलाव किए गए थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) विक्रांत वीर को पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) रजनीश वर्मा को हजरतगंज से हटाकर एसीपी अपराध की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इससे पहले हजरतगंज थाने के प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह को लाइन हाजिर किया गया था।

पुलिस आयुक्त के निर्देश पर एसीपी स्तर पर भी फेरबदल हुआ था। एसीपी कैसरबाग अभिषेक कुमार पाण्डेय को एसीपी हजरतगंज बनाया गया। हजरतगंज में तैनात रजनीश वर्मा को एसीपी अपराध की जिम्मेदारी दी गई। एसीपी कार्यालय में तैनात गौरव उपाध्याय को एसीपी कैसरबाग बनाया गया, जबकि एसीपी महानगर अंकित कुमार को महानगर के साथ कार्यालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया।

इन बदलावों के बाद अब तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी से मामले की जांच में आगे की कार्रवाई का रास्ता खुला है। हालांकि, प्रशासनिक फेरबदल और गिरफ्तारी के बीच किसी सीधे संबंध का निष्कर्ष आधिकारिक जानकारी के बिना नहीं निकाला जा सकता।

अब पूछताछ और साक्ष्यों पर टिकी निगाहें

शिवा शर्मा की मौत का मामला कई दिनों तक फरार आरोपियों की तलाश, श्रद्धा दुबे के दावों, आगरा के होटल से जुड़ी रिपोर्टों और पुलिस विभाग में हुए बदलावों के कारण चर्चा में रहा। अब श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और चालक दानिश की गिरफ्तारी के बाद जांच के अगले चरण पर ध्यान केंद्रित होगा।

पुलिस की पूछताछ में क्या तथ्य सामने आते हैं, कथित सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच से क्या स्पष्ट होता है तथा आरोपियों की भूमिका को लेकर जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है—इन सवालों के जवाब आने वाले समय में मिल सकते हैं। फिलहाल, गिरफ्तारी की पुष्टि पुलिस की ओर से की गई है, जबकि मौत की परिस्थितियों और आरोपियों की कथित भूमिका का अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

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