मेरठ की जिला अदालत ने सौरभ राजपूत हत्याकांड में दोषियों को मृत्युदंड सुनाया; देश को झकझोर देने वाले इस बहुचर्चित मामले में पहली बार किसी महिला को मिली फांसी की सजा
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में देश भर में सनसनी फैलाने वाले बहुचर्चित ‘नीला ड्रम हत्याकांड’ में जिला एवं सत्र न्यायालय ने बुधवार को अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने दोषी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की निर्मम हत्या के मामले में फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाई है। इस बहुचर्चित मामले में अदालत का यह कड़ा फैसला न्याय व्यवस्था में एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे मेरठ कचहरी परिसर और वकीलों में संतोष की लहर दौड़ गई।
घटनाक्रम और गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
यह खौफनाक वारदात 3 मार्च 2025 की है, जब मृतक सौरभ राजपूत लंदन से अपनी नौकरी छोड़कर अपने घर मेरठ लौटा था। मेरठ के ब्रह्मपुरी इलाके में उसकी योजनाबद्ध तरीके से हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद आरोपियों ने शव के टुकड़े-टुकड़े कर एक नीले ड्रम में भरे और उसके ऊपर सीमेंट से जमा दिया था, ताकि किसी को भनक न लगे।

मृतक के भाई बबलू राजपूत की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया और गहन छानबीन के बाद 19 मार्च 2025 को मुख्य आरोपी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस और एसआईटी ने इस मामले में मजबूत साक्ष्य जुटाए, जिसके आधार पर जुलाई 2025 में इस मामले का ट्रायल शुरू हुआ था।
13 महीने की लंबी सुनवाई और 22 गवाह
यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहा। करीब 13 महीनों तक चली इस अदालती कार्रवाई में कुल 126 तारीखों पर सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे ने मजबूत पैरवी की। इस दौरान अदालत में कुल 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। इन गवाहों में वे लोग भी शामिल थे, जिनसे आरोपियों ने हत्या में प्रयुक्त चाकू और शव छिपाने के लिए वह नीला ड्रम खरीदा था। सभी साक्ष्यों, बयानों और दलीलों को आधार बनाते हुए गत 30 सितंबर 2026 को अदालत ने दोनों को दोषी करार दिया था और बुधवार को सजा का ऐलान कर दिया गया।
कोर्ट रूम का माहौल और दोषियों की प्रतिक्रिया
बुधवार को जिला कारागार से दोनों दोषियों की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराई गई। सजा सुनाए जाने से पहले जब न्यायाधीश ने उनकी दिनचर्या या अपने पक्ष में कुछ कहने का मौका दिया, तो दोनों ने चुप रहना ही बेहतर समझा और कहा कि उन्हें कुछ नहीं कहना है। हालांकि, मुस्कान ने अपनी बेटी से मिलने की गुहार जरूर लगाई।

बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता रेखा जैन ने दलील दी कि दोनों की छोटी-छोटी बेटियां हैं और उनके पालन-पोषण तथा भविष्य को ध्यान में रखते हुए नरमी बरती जाए। लेकिन न्यायालय ने जुर्म की क्रूरता को देखते हुए इस दलील को खारिज कर दिया। अदालत द्वारा मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद दोनों दोषियों की आंखों में आंसू आ गए और वे काफी भावुक व अवाक रह गए। अदालत ने दोषियों पर 20 हजार रुपये का जुर्माना और 7 साल की अतिरिक्त सजा भी लगाई है।
पीड़ित परिवार और वकीलों की प्रतिक्रिया
फैसले के बाद पीड़ित सौरभ राजपूत के परिवार ने गहरी राहत और संतोष व्यक्त किया है। सौरभ की मां रेनू देवी ने कहा कि आज अदालत ने उन्हें न्याय दिलाया है, हालांकि जब दोषियों की फांसी की तारीख तय होगी, वह उनके लिए असली खुशी का दिन होगा। वहीं भाई राहुल ने कहा कि परिवार ने लंबी और कड़ी कानूनी लड़ाई लड़ी है और अदालत ने उनकी मांग के अनुरूप ही फैसला सुनाया है।
अभियोजन पक्ष के वकील और जानकारों का कहना है कि यह फैसला न केवल अपराधियों में खौफ पैदा करेगा, बल्कि यह मेरठ के न्यायिक इतिहास में भी एक अनूठा उदाहरण है जहां किसी जघन्य मामले में महिला को मृत्युदंड दिया गया है। फैसले के बाद कचहरी परिसर में वकीलों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जश्न मनाया और इसे न्याय की बड़ी जीत बताया।
यह भी पढ़े : तमिलनाडु में नवजात बच्चों को मिलेगी एक ग्राम सोने की अंगूठी
यह भी पढ़े : सीएम योगी की अधिवक्ताओं को बड़ी सौगात, पांच लाख तक कैशलेस इलाज
यह भी पढ़े : लोहिया ट्रस्ट की कमान अब अखिलेश के हाथ, शिवपाल की भूमिका बदली
यह भी पढ़े : लोक सेवक की जवाबदेही जरूरी, लोकायुक्त व्यवस्था पर अंकुश का काम करती है: योगी
यह भी पढ़े : BRICS SUMMIT 2026:भारत-चीन रिश्तों को नई दिशा, साझेदारी पर शी का जोर









