राघोपुर में भोज खाने जा रहे थे बच्चे, बीच धारा में पलटी नाव; सात लोगों को बचाया गया, मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये देगी बिहार सरकार, पीएम मोदी ने भी की आर्थिक सहायता की घोषणा
वैशाली/पटना। बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में गंगा नदी पर मंगलवार देर शाम हुए दर्दनाक नाव हादसे ने कई परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। पड़ोस के गांव में भोज खाने जा रहे बच्चों से भरी एक छोटी नाव नदी की बीच धारा में अचानक असंतुलित होकर पलट गई। देखते ही देखते नाव पर सवार लोग गहरे पानी में डूबने लगे। घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने बचाव की कोशिश शुरू की और प्रशासन को सूचना दी। हादसे में अब तक 13 बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है। इनमें सात बच्चे एक ही परिवार के बताए गए हैं। इस घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा है और मृत बच्चों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
भोज में शामिल होने जा रहे थे बच्चे
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसा राघोपुर थाना क्षेत्र के रामपुर श्यामचंद गांव के समीप गंगा नदी में हुआ। नाव पर करीब 20 लोग सवार थे। बताया गया कि बच्चे पड़ोस के गांव में आयोजित भोज में शामिल होने के लिए नदी पार कर रहे थे। इसी दौरान नाव बीच नदी में असंतुलित होकर पलट गई और उस पर सवार लोग पानी में गिर गए।
नाव पलटते ही आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीण तत्काल घटनास्थल की ओर दौड़े और अपने स्तर पर डूब रहे लोगों को बचाने का प्रयास किया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। इसके बाद स्थानीय लोगों और बचाव दल की मदद से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।
वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि अब तक 13 शव बरामद किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि नाव पर सवार सात लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। बचाए गए लोगों को उपचार के लिए एनएमसीएच भेजा गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बचाए गए सभी लोग खतरे से बाहर बताए गए हैं। कुछ घायलों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे चिकित्सा केंद्र में रेफर किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

सात बच्चे एक ही परिवार के, गांव में पसरा मातम
इस हादसे की सबसे दर्दनाक बात यह है कि जान गंवाने वाले सात बच्चे एक ही परिवार के बताए जा रहे हैं। एक ही परिवार के कई बच्चों की मौत से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जिन घरों में बच्चों की चहल-पहल और भविष्य के सपने थे, वहां अब अपनों को खोने का असहनीय दर्द है।
हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों की पहचान मीरा कुमारी, निशु कुमारी, अनिशा कुमारी, सुनीता कुमारी, आर्यन कुमार, मोहन कुमार, अमृता कुमारी, अंकिता कुमारी, पिंकी कुमारी, नमन कुमार, सिकी कुमारी, भोनू कुमारी और सोनम कुमारी के रूप में बताई गई है। सभी मृतक 15 वर्ष से कम उम्र के बताए गए हैं।
घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है। परिजनों की चीख-पुकार से हर कोई गमगीन है। ग्रामीणों के लिए यह हादसा किसी भयावह त्रासदी से कम नहीं है। एक सामान्य पारिवारिक आयोजन में शामिल होने के लिए निकले बच्चों की जिंदगी इस तरह खत्म हो जाएगी, इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
छह नावों की मदद से चला खोज अभियान
हादसे की सूचना मिलने के बाद प्रशासन और बचाव दल ने नदी में तलाशी अभियान शुरू किया। राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमें छह नावों की मदद से खोज अभियान में जुटीं। एसडीआरएफ के सब इंस्पेक्टर जय दीप नारायण सिंह के मुताबिक, बचाव अभियान कई घंटे तक जारी रहा और नदी में अन्य संभावित लापता लोगों की तलाश की गई।
अभियान के दौरान प्लास्टिक की शीट से अस्थायी रूप से मरम्मत की गई एक क्षतिग्रस्त नाव भी मिली। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों और नाव की स्थिति को लेकर जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
घटना की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी वर्षा सिंह और पुलिस अधीक्षक शुभांक मिश्रा भी मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्यों का जायजा लिया। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों को सहायता और घायलों को उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई।
मृतकों के परिवारों को चार-चार लाख रुपये देगी बिहार सरकार
हादसे पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि राघोपुर में नाव हादसे में मासूमों की मौत की खबर अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति और शोक संतप्त परिजनों को इस कठिन समय में दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार की ओर से प्रत्येक मृतक के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। उन्होंने प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने और घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) से हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद कर रहा है।

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति ने भी जताया दुख
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वैशाली में नाव दुर्घटना में बच्चों की मौत को अत्यंत दुखद बताया। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी गंगा नदी में नाव पलटने की घटना में हुई जनहानि पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि उन्हें इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति मिले। उन्होंने लापता लोगों की सुरक्षा के लिए भी प्रार्थना की।
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने हादसे को हृदयविदारक बताते हुए मासूम बच्चों की असामयिक मौत पर दुख जताया। उन्होंने शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
तेजस्वी यादव, चिराग पासवान और अन्य नेताओं ने जताई संवेदना
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राघोपुर दियारा क्षेत्र में नाव पलटने की घटना पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि डूबने वालों में अधिकांश बच्चे हैं। उन्होंने स्थानीय लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत कर राहत-बचाव तथा उपचार कार्यों में तेजी लाने की अपील की।
बिहार कांग्रेस ने भी घटना पर शोक व्यक्त करते हुए इसे हृदयविदारक बताया। पार्टी ने दिवंगत बच्चों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और उन्हें इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति मिलने की कामना की।
केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने भी हादसे पर दुख जताया। उन्होंने प्रभावित परिवारों तक तत्काल राहत पहुंचाने, घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और उचित मुआवजा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने भी बच्चों सहित कई लोगों की मौत पर शोक व्यक्त किया।
हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी खड़े किए सवाल
गंगा नदी में हुए इस हादसे ने नदी पार करने के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। नाव में क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने की आशंका जताई गई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। नाव की स्थिति, उसमें सवार लोगों की संख्या और दुर्घटना के अन्य कारणों का पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल प्रशासन का ध्यान राहत-बचाव कार्य, घायलों के उपचार और पीड़ित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने पर है। तेरह बच्चों की मौत ने पूरे वैशाली जिले को शोक में डुबो दिया है। यह हादसा उन परिवारों के लिए कभी न भरने वाला घाव बन गया है, जिन्होंने अपने मासूम बच्चों को खो दिया।
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