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यूपी चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण: फॉर्म-7 से नाम काटने के दावे भ्रामक, नियमों के तहत हुई कार्रवाई

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अखिलेश यादव के आरोपों के बाद निर्वाचन अधिकारी कार्यालय का बयान, कहा- नोटिस और जांच के बाद ही हटाए गए नाम

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा उठाए गए सवालों और 85,854 फॉर्म-7 स्वतः तैयार कर बिना कारण नाम काटने के दावों पर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह भ्रामक और आधारहीन करार दिया है।

आयोग ने स्पष्ट की पूरी प्रक्रिया

निर्वाचन आयोग की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया गया है कि किसी भी मतदाता का नाम बिना किसी ठोस कारण या मनमाने तरीके से नहीं काटा गया है।

  • आयोग के मुताबिक, जिन मामलों में फॉर्म-7 के जरिए नाम हटाने की प्रक्रिया अपनाई गई, उनमें पूरी पारदर्शिता बरती गई।
  • संबंधित मामलों में नियमानुसार नोटिस जारी करने, सुनवाई करने, फील्ड जांच और अंतिम आदेश पारित करने के बाद ही प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
  • इसके अलावा, 6 मार्च के बाद जितने भी मामले लंबित थे, उनका निस्तारण भी पूरी तरह से विधिक नियमों के तहत ही किया गया है। आयोग ने आम जनता और राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे भ्रामक जानकारियों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा रखें।

अखिलेश यादव ने उठाए थे तीखे सवाल

गौरतलब है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने निर्वाचन आयोग के रवैये को भेदभावपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया था कि उत्तर प्रदेश में एसआईआर की पूरी प्रक्रिया को एक तरह से शून्य कर दिया गया है और अब दोबारा मतदाता बनाने का अभियान चलाया जा रहा है।

अखिलेश यादव ने यह भी दावा किया था कि इस प्रक्रिया पर जनता का करोड़ों रुपया खर्च हुआ, प्रशासनिक अमला लगाया गया, लेकिन इसके बावजूद मतदाता सूचियों में भारी गड़बड़ियां सामने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई विधानसभा क्षेत्रों में एक ही व्यक्ति के दो से लेकर दस तक फर्जी वोट दर्ज किए गए हैं। सपा अध्यक्ष ने मांग की थी कि चुनाव आयोग को पूरी निष्पक्षता दिखाते हुए अपनी साख और विश्वसनीयता साबित करनी चाहिए।

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