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चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का मार्च

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संसद से निर्वाचन आयोग कार्यालय तक निकले INDIA गठबंधन के सांसद, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR रोकने की मांग

नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद मंगलवार को सड़क पर दिखाई दिया। INDIA गठबंधन के सांसदों ने संसद परिसर से निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर विरोध मार्च निकाला। मार्च में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों समेत विपक्षी दलों के सांसद शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को रोकने की रही।

मार्च को पुलिस ने संसद मार्ग के पास रोक दिया। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने वहीं धरना दिया। राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाए।

खड़गे बोले- लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई

विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्ष लोकतंत्र की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करता रहेगा। कांग्रेस नेताओं ने SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और इसे मतदाताओं के अधिकारों से जोड़कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने प्रदर्शन को आगे भी जारी रखने की बात कही। वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पिछले चुनावों और चंडीगढ़ मेयर चुनाव विवाद का भी उल्लेख किया।

विपक्ष ने रखीं तीन प्रमुख मांगें

कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन के मुताबिक विपक्ष की प्रमुख मांगों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR प्रक्रिया को रद्द करना और चुनाव बैलेट पेपर से कराना शामिल है।

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने SIR और मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों को लेकर कानूनी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रक्रिया का उद्देश्य नए मतदाताओं को जोड़ने के बजाय मतदाता सूची से नाम हटाना है।

Form-6 को लेकर भी विवाद

विपक्ष ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में किए गए बदलावों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया था कि Form-6 में बदलाव नियमों के विपरीत किया गया है। हालांकि चुनाव आयोग ने इस दावे को भ्रामक बताया है। आयोग का कहना है कि बिहार में SIR का आदेश 24 जून 2025 को आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था और सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के फैसले में इसे बरकरार रखा है।

सुप्रीम कोर्ट ने 5 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान कहा था कि उसके समक्ष रिकॉर्ड आने पर यह देखा जाएगा कि Form-6 में संबंधित बदलाव किसने किया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसके द्वारा किसी संशोधित Form-6 को मंजूरी नहीं दी गई थी।

विपक्ष का आंदोलन जारी रखने का ऐलान

विपक्षी दलों ने संकेत दिया है कि SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर उनका विरोध आगे भी जारी रहेगा। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ भाजपा विपक्ष के आरोपों को खारिज करते रहे हैं। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण पात्र मतदाताओं को शामिल करने और अपात्र या दोहराए गए नामों को हटाने की प्रक्रिया का हिस्सा है।

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