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महानिदेशक ने किया जिला कारागार सुलतानपुर का निरीक्षण, व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश

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अस्पताल और बैरकों का लिया जायजा, महिला बंदियों व बच्चों से किया संवाद, पारिश्रमिक भुगतान सुनिश्चित करने को कहा

सुलतानपुर। महानिदेशक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं, उत्तर प्रदेश ने बुधवार को जिला कारागार सुलतानपुर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जेल की सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों के स्वास्थ्य एवं कल्याण, मूलभूत सुविधाओं और कारागार में संचालित विभिन्न व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान महानिदेशक ने अधिकारियों को बंदियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, मानवीय गरिमा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

कारागार अस्पताल में बंदियों से किया संवाद

निरीक्षण के दौरान महानिदेशक ने सबसे पहले कारागार अस्पताल का जायजा लिया। उन्होंने अस्पताल में उपचाररत और निरुद्ध बंदियों से सीधे संवाद कर उनके स्वास्थ्य की स्थिति, चिकित्सा सुविधाओं और उपलब्ध उपचार के बारे में जानकारी प्राप्त की।

उन्होंने बंदियों से यह भी जाना कि उन्हें उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर किसी प्रकार की परेशानी तो नहीं है। बंदियों की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशीलता बरतते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

महानिदेशक ने जेल प्रशासन को निर्देशित किया कि कारागार में निरुद्ध प्रत्येक बंदी को आवश्यकतानुसार बेहतर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और स्वास्थ्य संबंधी मामलों में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।

विभिन्न बैरकों का भी निरीक्षण

महानिदेशक ने कारागार की विभिन्न बैरकों का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने साफ-सफाई, रख-रखाव और बंदियों के लिए उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की स्थिति को देखा।

उन्होंने बैरकों की आवश्यक मरम्मत और रख-रखाव का कार्य प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों से कहा गया कि कारागार परिसर में व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रहें और बंदियों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं की नियमित निगरानी की जाए।

महिला बैरक में बच्चों से भी मिले

निरीक्षण के दौरान महानिदेशक ने महिला बैरक का भी दौरा किया। उन्होंने महिला बंदियों और उनके साथ रह रहे बच्चों से आत्मीयतापूर्वक संवाद किया तथा उनकी आवश्यकताओं और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।

इस दौरान बच्चों को खिलौने और पुस्तकें वितरित की गईं, जबकि महिला बंदियों को फल दिए गए। महानिदेशक ने बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और समुचित देखभाल पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों की आवश्यकताओं को संवेदनशीलता के साथ समझते हुए उनके लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

बंदियों के पारिश्रमिक का नियमानुसार भुगतान हो

कारागार की व्यवस्थाओं की समीक्षा के दौरान महानिदेशक ने बंदियों द्वारा किए जाने वाले कार्य के एवज में देय पारिश्रमिक के भुगतान की भी जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिया कि बंदियों को उनके द्वारा किए गए कार्य के सापेक्ष नियमानुसार देय पारिश्रमिक का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कारागार प्रशासन को व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और नियमों के पालन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए, ताकि बंदियों को उनके अधिकारों के अनुरूप सुविधाएं और लाभ मिल सकें।

सुरक्षा और मानवीय गरिमा सर्वोच्च प्राथमिकता

निरीक्षण के दौरान महानिदेशक ने कहा कि कारागार प्रशासन का दायित्व केवल सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि बंदियों के स्वास्थ्य, कल्याण और मानवीय गरिमा का भी ध्यान रखना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बंदियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, मानवीय गरिमा एवं कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कारागार की सभी व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़, सुव्यवस्थित एवं प्रभावी बनाया जाए।

उन्होंने कारागार प्रशासन को व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी करने और जहां भी सुधार की आवश्यकता हो, वहां तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

जेल के अधिकारियों ने दी व्यवस्थाओं की जानकारी

निरीक्षण के अवसर पर जेल अधीक्षक प्रांजिल अरविन्द, जेलर ओमकार पाण्डेय, जेल चिकित्साधिकारी डॉ. अमन यादव सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने महानिदेशक को कारागार में संचालित विभिन्न व्यवस्थाओं की जानकारी दी और निरीक्षण के दौरान दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुपालन का भरोसा दिलाया।

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