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सवर्ण समाज के मुद्दों पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भड़के सूरज प्रसाद चौबे, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

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सवर्ण आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने केंद्र और राज्य सरकारों की कथित नीतियों पर जताया विरोध, नेताओं से खुलकर आवाज उठाने की अपील

लखनऊ। सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने केंद्र और राज्य सरकारों की कथित सवर्ण विरोधी नीतियों को लेकर सवर्ण समाज के सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और अन्य जनप्रतिनिधियों पर तीखा आक्रोश जताया है। उन्होंने कहा कि समाज से जुड़े मुद्दों पर सरकार की कथित नीतियों के बावजूद सवर्ण जनप्रतिनिधियों की चुप्पी समझ से परे है।

सूरज प्रसाद चौबे ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर सवर्ण समाज के सांसद, विधायक और नेता अपने समाज के अधिकारों और सम्मान के लिए आवाज क्यों नहीं उठाते। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से समानता, सम्मान और अधिकार से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी भूमिका तय करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज के जनप्रतिनिधियों को महाराणा प्रताप, चंद्रशेखर आजाद, मंगल पांडेय और सुभाष चंद्र बोस जैसे महापुरुषों के संघर्ष और राष्ट्रहित की भावना से प्रेरणा लेनी चाहिए। चौबे ने कहा कि यदि सवर्ण नेताओं ने समाज के बराबरी के हक, अधिकार और सम्मान के लिए आवाज नहीं उठाई तो आने वाले समय में समाज उनसे सवाल करेगा।

‘अभी भी वक्त है, जनप्रतिनिधियों को जागना होगा’

सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि अभी भी समय है कि सवर्ण समाज के सांसद, विधायक, मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधि अपनी भूमिका पर विचार करें। उन्होंने कहा कि समाज अब ऐसे जनप्रतिनिधियों की अपेक्षा कर रहा है जो उसके अधिकारों और सम्मान से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाएं।

उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि समाज के अधिकार और बराबरी के सवाल पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भविष्य में उनके लिए राजनीतिक रूप से भारी पड़ सकती है। उन्होंने सवर्ण समाज के नेताओं से अपने जमीर की आवाज सुनने और समाज से जुड़े मुद्दों पर खुलकर सामने आने की अपील की।

हर्ष दुबे और RHA को लेकर भी साधा निशाना

चौबे ने हर्ष दुबे को आरक्षण सुधार से जुड़े RHA अभियान को आगे बढ़ाने के लिए बधाई दी, लेकिन इसी के साथ उन्होंने अभियान की दिशा को लेकर सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा कि जिस मुद्दे को लेकर आंदोलन शुरू किया गया था, उसे राजनीतिक नेतृत्व के समक्ष रखने के बावजूद आंदोलन को अपेक्षित परिणाम नहीं मिला।

उन्होंने हर्ष दुबे और उनके साथियों के साथ-साथ भाजपा के वरिष्ठ नेताओं जेपी नड्डा और पाठक का नाम लेते हुए भी अपनी नाराजगी जाहिर की। चौबे ने कहा कि उनका आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है और आगे भी जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज अपने अधिकार, समानता और सम्मान के मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठाता रहेगा। चौबे ने दावा किया कि आंदोलन की दिशा और भविष्य का फैसला समाज की मांगों और सरकार की नीतियों के आधार पर होगा।

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