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भारत पर 100% टैरिफ का खतरा, रूस पर प्रतिबंध वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास

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एसएमयूपीन्यूज, डेस्क । अमेरिका और रूस की तनातनी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। रूस और उसके दोस्तों को तोड़ने के लिए अमेरिका ने ब्रह्मास्त्र चल दिया है। अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार 7 जुलाई को रूस पर प्रतिबंध वाले बिल को मंजूरी दे दी है। इस बिल में 100 फीसदी टैरिफ लगाने का प्रावधान है। इसका मकसद रूस से ऊर्जा खरीद करने वाले भारत और चीन जैसे देशों पर भारी टैरिफ लगाना है।

अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकार देने वाला बिल पास

अमेरिकी सीनेट ने रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 टैरिफ लगाने का अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकार देने वाला बिल शुक्रवार को पास कर दिया। सीनेट में इस बिल को 86-11 के भारी बहुमत से पास किया गया। अब इसे अमेरिकी हाउस (कांग्रेस) में पेश किया जाएगा। इसके पहले बिल का नाम बदलकर लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 किया गया। यह बिल पूर्व अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने तैयार किया था, जिनकी पिछले महीने अचानक मौत हो गई थी।

भारत और चीन जैसे देशों के खिलाफ लगेगा 100 फीसदी टैरिफ

इस बिल का मकसद मॉस्को व तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। बिल को मंजूरी मिलने के बाद ट्रंप को भारत, चीन जैसे देशों के खिलाफ 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा। साथ ही, यह उन देशों को भी निशाना बनाता है, जो तेल-गैस खरीद के जरिये रूस के युद्ध प्रयासों को आर्थिक मदद जारी रखे हुए हैं।

रूसी तेल और गैस आयातकों पर लगेगा प्रतिबंध

यह बिल अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों के सामान पर 100% टैरिफ लगाने की मंजूरी देता है, जो रूसी तेल और गैस के शीर्ष 5 आयातक हैं। इनमें भारत और चीन भी शामिल हैं। तर्क दिया गया है कि इससे रूस की पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से होने वाली कमाई कम होगी और मॉस्को पर यूक्रेन युद्ध को खत्म करने का दबाव बढ़ेगा। इस समय चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया रूस के शीर्ष 5 ऊर्जा खरीदार हैं।

रिपब्लिकन व डेमोक्रेट दोनों पार्टियों का समर्थन

खास बात यह है कि इस बिल को रिपब्लिकन व डेमोक्रेट दोनों पार्टियों का समर्थन मिला। दोनों पार्टियों के समर्थन वाले इस बिल को दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट रिचर्ड ब्लूमेंथल ने आगे बढ़ाया था। सीनेट में इसे 86 वोटों के साथ भारी समर्थन हासिल हुआ। केंटकी के रैंड पॉल अकेले ऐसे रिपब्लिकन थे, जिन्होंने इस कानून का विरोध किया। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी के 10 सीनेटरों ने इसके विरोध में वोट किया।

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