लखनऊ। राजधानी लखनऊ में पहली बार सामने आए ‘बॉस स्कैम’ (Business Impersonation Fraud) के मामले का साइबर क्राइम थाना पुलिस ने सफल अनावरण करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। इस मामले में ठगी के शिकार एक प्रतिष्ठित कारोबारी के अकाउंटेंट से 18 लाख रुपये की साइबर ठगी की गई थी। पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते अब तक 10.85 लाख रुपये पीड़ित के खाते में वापस कराए जा चुके हैं। शेष धनराशि की रिकवरी और अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
पुलिस के अनुसार, शहर की प्रसिद्ध फर्म CALCUTTA REGALIA के अकाउंटेंट को व्यवसायी के पुत्र के नाम से व्हाट्सएप पर फर्जी संदेश भेजा गया। साइबर अपराधियों ने मालवेयर युक्त लिंक और फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर कर्मचारी को विश्वास में लिया और गोपनीय भुगतान के नाम पर 18 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए।
गोल्डन ऑवर में कार्रवाई से मिली बड़ी सफलता
मामले की शिकायत मिलते ही पुलिस आयुक्त के निर्देशन में संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय), पुलिस उपायुक्त (अपराध), अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) और सहायक पुलिस आयुक्त (साइबर क्राइम) की निगरानी में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर ‘गोल्डन ऑवर रिस्पॉन्स’ के तहत कार्रवाई शुरू की।
जांच के दौरान संबंधित बैंकों, पेमेंट एग्रीगेटर्स और अन्य वित्तीय संस्थानों से समन्वय स्थापित कर संदिग्ध खातों को चिन्हित किया गया और धनराशि होल्ड कराई गई। पहले चरण में 6 लाख रुपये वापस कराए गए थे, जबकि आगे की कार्रवाई में 4.85 लाख रुपये और रिकवर कर पीड़ित के खाते में वापस भेज दिए गए। इस प्रकार अब तक कुल 10.85 लाख रुपये वापस कराए जा चुके हैं।
तीन आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी
पुलिस ने इस मामले में मध्य प्रदेश के ग्वालियर से तीन साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। मामले में शामिल अन्य आरोपितों की पहचान, गिरफ्तारी और शेष धनराशि की रिकवरी के लिए तकनीकी एवं कानूनी कार्रवाई लगातार जारी है।
क्या होता है ‘बॉस स्कैम’?
अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) किरण यादव (आईपीएस) ने बताया कि ‘बॉस स्कैम’ साइबर ठगी का तेजी से बढ़ता तरीका है। इसमें अपराधी किसी कंपनी के मालिक, निदेशक, सीईओ या उनके परिजन बनकर कर्मचारियों को व्हाट्सएप, ई-मेल या फर्जी मोबाइल नंबर से संदेश भेजते हैं। आमतौर पर संदेश में लिखा होता है— “मीटिंग में हूं, कॉल मत करना”, “यह गोपनीय भुगतान है” या “अभी तुरंत पैसे ट्रांसफर करो”। कर्मचारी दबाव और विश्वास में आकर रकम ट्रांसफर कर देता है।
पीड़ित ने जताया पुलिस का आभार
पीड़ित व्यवसायी ने साइबर क्राइम पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इतनी बड़ी राशि वापस मिल पाएगी। उन्होंने पुलिस की तकनीकी दक्षता और संवेदनशील कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए पूरी टीम का धन्यवाद दिया।
साइबर पुलिस की अपील
साइबर क्राइम पुलिस ने लोगों से अपील की है कि केवल व्हाट्सएप प्रोफाइल फोटो या नाम देखकर किसी भी वित्तीय निर्देश का पालन न करें। किसी भी भुगतान से पहले संबंधित अधिकारी से आधिकारिक नंबर पर पुष्टि अवश्य करें। संदिग्ध लिंक, APK फाइल या अज्ञात एप डाउनलोड करने से बचें। यदि साइबर ठगी का शिकार हों तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत करने से धनराशि वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
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