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12 साल जेल, फिर नई जिंदगी या फिर अपराध? एनकाउंटर में मारे गए संजय की कहानी पर उठ रहे कई सवाल

एक तरफ पुलिस उसे एक लाख का इनामी और बिल्डर हत्याकांड का मुख्य शूटर बता रही

दूसरी ओर परिवार का दावा—”15 दिन से उसका फोन बंद था, उसे झूठा फंसाया गया”

अंबेडकरनगर/लखनऊ। राजधानी लखनऊ में एसटीएफ और पुलिस की मुठभेड़ में मारे गए एक लाख रुपये के इनामी बदमाश संजय उर्फ संजीव की मौत ने सिर्फ एक अपराधी के अंत की कहानी नहीं छोड़ी, बल्कि कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। पुलिस के अनुसार वह लखनऊ के चर्चित बिल्डर संदीप सिंह हत्याकांड का मुख्य शूटर था, जबकि उसके परिजन इसे पूरी तरह साजिश बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

संजय उर्फ संजीव की मौत के बाद अंबेडकरनगर के अहिरौली थाना क्षेत्र के चककोडार गांव में मातम पसरा है। जिस घर से कभी एक युवक अपराध की दुनिया में निकला था, उसी घर में अब उसकी मौत पर सन्नाटा है। पिता हरिराम और भाई राज बब्बर का कहना है कि परिवार को समझ ही नहीं आ रहा कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि उनका बेटा पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।

अपराध की दुनिया में कैसे रखा कदम

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, संजय ने वर्ष 2011 में अयोध्या के कुख्यात अपराधी दिलीप वर्मा के साथ मिलकर अंबेडकरनगर में लूट और हत्या की कई वारदातों को अंजाम दिया था। महरुआ और अकबरपुर थाना क्षेत्रों में दर्ज मामलों के बाद उसका नाम अपराधियों की सूची में तेजी से ऊपर पहुंच गया।

इन मामलों में गिरफ्तारी के बाद वह लगभग 12 वर्ष जेल में बंद रहा। पुलिस का कहना है कि जेल से बाहर आने के बाद उसने फिर से आपराधिक गतिविधियां शुरू कर दी थीं और हाल के दिनों में वह संगठित अपराध से जुड़ गया था।

परिवार की कहानी बिल्कुल अलग

लेकिन परिवार की कहानी इससे बिल्कुल अलग है।

पिता हरिराम कहते हैं कि जेल से बाहर आने के बाद संजय ने अपनी जिंदगी बदलने की कोशिश की थी। वह प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता था और चीनी मिल में पगास ढुलाई का भी व्यवसाय कर रहा था।

परिजनों का दावा है कि वह परिवार के खर्च उठाने में जुटा था और धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट रहा था।उनके अनुसार, 21 अप्रैल को वह अपनी बहन रूपा की शादी में पूरे उत्साह के साथ शामिल हुआ था। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही सप्ताह बाद उसकी मौत की खबर आएगी।

“15 दिन से फोन बंद था”

परिवार का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पुलिस का दावा सही है तो संजय पिछले करीब 15 दिनों से घरवालों के संपर्क में क्यों नहीं था?भाई राज बब्बर का कहना है कि संजय का मोबाइल फोन लगातार बंद आ रहा था। परिवार उसे खोजने की कोशिश कर रहा था। उनका आरोप है कि उन्हें उसकी किसी गतिविधि की जानकारी नहीं थी।

पुलिस का दावा

पुलिस का कहना है कि संजय फरार चल रहा था और लखनऊ के चर्चित बिल्डर संदीप सिंह हत्याकांड का मुख्य शूटर था। उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था।पुलिस के अनुसार, इंदिरा कैनाल रोड पर घेराबंदी के दौरान उसने पुलिस टीम पर फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में वह घायल हुआ और अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई।

गांव में चर्चा का विषय बना एनकाउंटर

चककोडार गांव में लोग दो तरह की बातें कर रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि संजय का पुराना आपराधिक इतिहास किसी से छिपा नहीं था। वहीं कुछ ग्रामीणों का कहना है कि जेल से लौटने के बाद वह पहले जैसा नहीं दिखता था और कारोबार में व्यस्त रहता था।

हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

सवाल जिनके जवाब अभी बाकी हैं

एनकाउंटर के बाद अब कई सवाल चर्चा में हैं—

क्या संजय वास्तव में हाल के चर्चित हत्याकांड में शामिल था?
यदि वह अपराध में सक्रिय था, तो उसके खिलाफ जांच में और क्या साक्ष्य मिले?
परिवार का यह दावा कि वह सामान्य जीवन जी रहा था, उसकी सच्चाई क्या है?
पिछले 15 दिनों तक उसका फोन बंद रहने की वजह क्या थी?

इन सवालों के जवाब पुलिस की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

दो तस्वीरें, एक कहानी

संजय उर्फ संजीव की कहानी दो अलग-अलग तस्वीरें पेश करती है। पहली तस्वीर पुलिस की है, जिसमें वह एक लाख का इनामी, संगठित अपराध से जुड़ा कुख्यात शूटर और कई गंभीर मामलों का आरोपी था। दूसरी तस्वीर उसके परिवार की है, जो उसे अपनी गलती सुधारने की कोशिश कर रहे बेटे और भाई के रूप में याद कर रहा है।

इन दोनों दावों के बीच सच्चाई का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही होगा। फिलहाल एक बात तय है कि अंबेडकरनगर के चककोडार गांव में एक परिवार अपने बेटे की मौत का गम मना रहा है, जबकि पुलिस इसे एक बड़े अपराधी के अंत के रूप में देख रही है।

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