अलीगंज अग्निकांड: निलंबित फायर अधिकारी ने सीएम योगी को लिखा पत्र, कार्रवाई पर उठाए सवाल

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में कोचिंग सेंटर और एनीमेशन संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड के बाद जहां प्रशासन दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में जुटा है, वहीं इस मामले में निलंबित किए गए फायर विभाग के एक अधिकारी ने कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फायर विभाग में तैनात फायर स्टेशन सेकेंड ऑफिसर (एफएसएसओ) कमलेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर अपने निलंबन को अन्यायपूर्ण बताया है। उनका पत्र और एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
पत्र में कमलेंद्र सिंह ने कहा है कि अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में लगी आग की घटना अत्यंत दुखद है, जिसमें छात्र-छात्राओं सहित 15 लोगों की मौत हुई। उन्होंने मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस गंभीर हादसे में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होना आवश्यक है, लेकिन बिना अधिकार क्षेत्र और जिम्मेदारी की सही जांच किए उनके खिलाफ की गई कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है।
कमलेंद्र सिंह का कहना है कि एफएसएसओ के रूप में उनका कार्यक्षेत्र सीमित है। उनकी भूमिका स्थानीय स्तर पर निरीक्षण करने और संबंधित रिपोर्ट तैयार करने तक सीमित रहती है। भवनों को फायर क्लीयरेंस जारी करना, अग्नि सुरक्षा मानकों का व्यापक अनुपालन सुनिश्चित करना और पूरे जिले की फायर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
उन्होंने पत्र में दावा किया है कि शहर में भवनों को फायर एनओसी और सुरक्षा स्वीकृति देने की जिम्मेदारी मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) की होती है। ऐसे में यदि कोई भवन आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत होने के बावजूद लंबे समय से व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग किया जा रहा था, तो इसकी जानकारी और निगरानी उच्च अधिकारियों के स्तर पर होनी चाहिए थी।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिस इमारत में हादसा हुआ, उसका उपयोग कथित तौर पर वर्षों से व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। वहां कोचिंग सेंटर, एनीमेशन प्रशिक्षण संस्थान और अन्य गतिविधियां संचालित हो रही थीं। इसके बावजूद यदि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हुआ या आवश्यक अनुमतियों की समीक्षा नहीं की गई, तो इसकी जिम्मेदारी केवल निचले स्तर के अधिकारियों पर नहीं डाली जा सकती।
कमलेंद्र सिंह ने आग लगने के बाद राहत एवं बचाव कार्यों में हुई कथित देरी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी का भी जिक्र किया है। उनका कहना है कि इस पहलू की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, क्योंकि ऐसी परिस्थितियों में समय पर कार्रवाई कई लोगों की जान बचा सकती थी।
गौरतलब है कि अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित एक बहुमंजिला इमारत में सोमवार को भीषण आग लग गई थी। हादसे में कोचिंग और एनीमेशन संस्थान से जुड़े 15 छात्र-छात्राओं और युवाओं की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हो गए थे। प्रारंभिक जांच में आग लगने के पीछे शॉर्ट सर्किट और एसी कंप्रेसर फटने जैसी आशंकाएं सामने आई हैं। मामले की जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।
हादसे के बाद सरकार ने प्रथम दृष्टया लापरवाही मानते हुए बिजली विभाग, फायर विभाग और विकास प्राधिकरण के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। इनमें एफएसएसओ कमलेंद्र सिंह का नाम भी शामिल है। साथ ही भवन मालिक, कोचिंग संचालक और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कई गिरफ्तारियां भी की गई हैं।
वहीं एसआईटी और फॉरेंसिक टीम घटना के कारणों, सुरक्षा मानकों के पालन और विभिन्न विभागों की भूमिका की जांच में जुटी हुई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के लिए किस स्तर पर लापरवाही हुई और जिम्मेदारी किसकी बनती है।
फिलहाल निलंबित अधिकारी के पत्र ने इस पूरे मामले में एक नया आयाम जोड़ दिया है। अब देखना होगा कि सरकार और जांच एजेंसियां उनके द्वारा उठाए गए सवालों को किस तरह से परखती हैं और अंतिम जांच रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं।
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