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संभल में सरकारी जमीन पर चला बुलडोजर, 50 साल पुरानी मजार और छह कब्रें हटाई गईं

संभल। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक मजार और छह कब्रों को बुलडोजर से हटवा दिया। यह कार्रवाई शनिवार शाम गुन्नौर तहसील क्षेत्र में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में की गई। प्रशासन का दावा है कि संबंधित भूमि सार्वजनिक आरक्षित श्रेणी की सरकारी जमीन है, जिस पर अवैध कब्जा कर निर्माण किया गया था।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई लेखपाल अभिनव बंसल की रिपोर्ट के आधार पर की गई। रिपोर्ट मिलने के बाद गुन्नौर तहसीलदार रवि सोनकर ने अतिक्रमण हटाने के लिए विशेष टीम का गठन किया। टीम में नायब तहसीलदार अनुज कुमार को प्रभारी बनाया गया, जबकि राजस्व निरीक्षक गवेन्द्र सिंह और जाहरी सिंह को सहायक के रूप में तैनात किया गया। इसके अलावा कई लेखपाल और राजस्व कर्मी भी अभियान में शामिल रहे।

तहसीलदार रवि सोनकर ने बताया कि ढाका क्षेत्र में स्थित लगभग साढ़े छह बीघा भूमि सार्वजनिक आरक्षित श्रेणी की है। इस जमीन पर कुछ अस्थायी निर्माण, नींव, एक मजार और कई कब्रें बनाकर कब्जा किया गया था। उन्होंने कहा कि कब्जाधारियों को पहले नोटिस देकर अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया था, लेकिन निर्धारित समय में कब्जा नहीं हटाया गया। इसके बाद राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की।

प्रशासन के अनुसार यह भूमि तीन अलग-अलग गाटा संख्याओं में फैली हुई है और इसके एक हिस्से पर अतिक्रमण किया गया था। कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर तैनात रहा। अधिकारियों की मौजूदगी में बुलडोजर से अतिक्रमण हटाया गया और भूमि को कब्जामुक्त कराया गया।

वहीं, स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने प्रशासनिक कार्रवाई पर अपनी आपत्ति जताते हुए दावा किया कि यहां स्थित बाबा सलाहउद्दीन ढाक वाले पीर बाबा की मजार करीब 50 वर्ष पुरानी थी। समुदाय के लोगों के अनुसार कुछ कब्रें भी कई दशक पुरानी थीं। उनका कहना है कि इरशाद हुसैन की कब्र लगभग 150 वर्ष पुरानी बताई जाती है, जबकि अन्य कब्रें भी अलग-अलग समय में बनाई गई थीं।

कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में तनाव की आशंका को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। हालांकि पूरे अभियान के दौरान स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही और किसी प्रकार की अप्रिय घटना सामने नहीं आई।

प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसे अतिक्रमणों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। वहीं स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।

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