इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के खिलाफ एआईपीईएफ का बड़ा विरोध, देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

लखनऊ । बेंगलुरु में आयोजित ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) की फेडरल एग्जीक्यूटिव की बैठक में सर्वसम्मति से इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल, 2025 के विरुद्ध प्रस्ताव पारित करते हुए इसे देश के सार्वजनिक विद्युत क्षेत्र, उपभोक्ताओं, किसानों, बिजली कर्मियों तथा संघीय ढांचे के लिए गंभीर खतरा बताया गया।
बैठक में कहा गया कि 09 अक्टूबर 2025 को जारी किए गए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 विधेयक के मसौदे पर हितधारकों को पर्याप्त समय नहीं दिया गया। देशभर के बिजली अभियंताओं, कर्मचारियों, ट्रेड यूनियनों, उपभोक्ता संगठनों, किसान संगठनों, राज्य विद्युत उपक्रमों तथा ऊर्जा विशेषज्ञों द्वारा व्यापक विरोध दर्ज कराने के बावजूद केंद्र सरकार इस विधेयक को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
एआईपीईएफ ने कहा कि 12 जनवरी 2026 को देशभर के बिजली कर्मियों एवं अभियंताओं के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से विधेयक वापस लेने की मांग की थी, किंतु ऊर्जा मंत्रालय ने आज तक उस बैठक का कार्यवृत्त तक जारी नहीं किया। इससे लोकतांत्रिक परामर्श प्रक्रिया की अनदेखी स्पष्ट होती है।
फेडरेशन ने विशेष चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रस्तावित विधेयक एक ही वितरण क्षेत्र में सार्वजनिक धन से निर्मित नेटवर्क का उपयोग करते हुए अनेक वितरण लाइसेंसधारियों को कार्य करने की अनुमति देता है। इससे निजी कंपनियों को लाभकारी औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को चुनने का अवसर मिलेगा, जबकि घरेलू, कृषि एवं ग्रामीण उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी सार्वजनिक वितरण कंपनियों पर ही बनी रहेगी। इससे सार्वजनिक डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति कमजोर होगी और अंततः निजीकरण का मार्ग प्रशस्त होगा।
एआईपीईएफ ने कहा कि देश के 90 प्रतिशत से अधिक उपभोक्ता घरेलू श्रेणी के हैं जिनका कनेक्टेड लोड 5 किलोवाट से कम है। विधेयक का लाभ केवल बड़े उपभोक्ताओं को मिलेगा जबकि आम उपभोक्ताओं, किसानों, छोटे व्यापारियों और कमजोर वर्गों के हित प्रभावित होंगे। उच्च राजस्व देने वाले उपभोक्ताओं के निजी आपूर्तिकर्ताओं की ओर जाने से सार्वजनिक डिस्कॉम की आय घटेगी और सामान्य उपभोक्ताओं पर टैरिफ वृद्धि का बोझ पड़ेगा।फेडरेशन ने यह भी कहा कि प्रस्तावित संशोधन सार्वजनिक वितरण कंपनियों पर सार्वभौमिक सेवा दायित्व बनाए रखते हैं जबकि निजी कंपनियों को अलाभकारी क्षेत्रों में आपूर्ति से बचने का अवसर देते हैं। यह व्यवस्था “मुनाफे का निजीकरण और घाटे का सामाजिककरण” है।
बैठक में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी यह दर्शाता है कि वितरण क्षेत्र में तथाकथित प्रतिस्पर्धा से उपभोक्ताओं को अपेक्षित लाभ नहीं मिला है। इसके विपरीत कई देशों में इससे वित्तीय अस्थिरता और नियामकीय जटिलताएं बढ़ी हैं।एआईपीईएफ ने चेतावनी दी कि यह विधेयक वितरण कंपनियों के निजीकरण को तेज करेगा, जिससे बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं की सेवा सुरक्षा, पदोन्नति, सेवा शर्तों और सेवानिवृत्ति लाभों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।फेडरेशन ने यह भी कहा कि बिजली समवर्ती सूची का विषय है तथा प्रस्तावित संशोधन राज्यों के अधिकारों और संघीय ढांचे को कमजोर करते हैं।
फेडरल एग्जीक्यूटिव ने सर्वसम्मति से मांग की कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल, 2025 को तत्काल वापस लिया जाए तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली, क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था और राज्य विद्युत उपक्रमों की वित्तीय स्थिरता को कमजोर करने वाले सभी प्रावधान समाप्त किए जाएं।एआईपीईएफ ने निर्णय लिया है कि यदि संसद के मानसून सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल, 2025 को लोकसभा या राज्यसभा में पेश किया जाता है तो नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज एंड इंजीनियर्स तथा अन्य ट्रेड यूनियनों के साथ मिलकर देशव्यापी विरोध आंदोलन शुरू किया जाएगा।
फेडरल एग्जीक्यूटिव ने एआईपीईएफ नेतृत्व को यह अधिकार भी प्रदान किया है कि विधेयक संसद में पेश किए जाने की विश्वसनीय सूचना मिलते ही पूरे देश में अल्प सूचना पर “लाइटनिंग स्ट्राइक” का आह्वान किया जा सके।देशभर के विद्युत उत्पादन, पारेषण एवं वितरण प्रतिष्ठानों, परियोजनाओं, कार्यालयों तथा जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन, गेट मीटिंग, सभा एवं जनजागरण अभियान आयोजित किए जाएंगे। साथ ही उपभोक्ताओं, किसानों, जनप्रतिनिधियों तथा नागरिक समाज को विधेयक के दुष्प्रभावों से अवगत कराने हेतु व्यापक जन अभियान चलाया जाएगा।
एआईपीईएफ ने सभी राज्य स्तरीय अभियंता संगठनों, बिजली कर्मचारी संघों, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, किसान संगठनों, उपभोक्ता संगठनों, सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी संगठनों तथा लोकतांत्रिक एवं सामाजिक संगठनों से एकजुट होकर सार्वजनिक बिजली क्षेत्र की रक्षा के लिए संघर्ष में शामिल होने का आह्वान किया है।फेडरेशन ने पुनः स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल, 2025 कोई सुधारात्मक विधेयक नहीं बल्कि निजीकरण को बढ़ावा देने वाला विधेयक है और एआईपीईएफ इसका पूरी ताकत और एकजुटता के साथ विरोध करेगा।
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