लखनऊ । यूपी में बिजली को लेकर अब सियासत तेज हो गई है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में बिजली संकट को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार को समस्या का समाधान निकालने में पूरी तरह से विफल बताया है। उन्होंने बिजली समस्या को लेकर भाजपा जनप्रतिनिधियों के पत्रों को सरकार की विफलता करार दिया है। अखिलेश ने सोमवार को बिजली आपूर्ति संकट को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
हमारे गठबंधन में ऐसे नेताओं के लिए कोई जगह नहीं
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि उप्र में असहनीय ‘महा विद्युत आपदा’ की वजह से लगातार बढ़ते आक्रोश से बचने के लिए भयभीत भाजपाई विधायक-सांसद दिखावटी चिट्ठी के रूप में जिस ‘कागजी कवच’ से खुद को बचाना चाह रहे हैं, वो चिट्ठी दरअसल अपनी सरकार को लिखा कोई ‘जन हित का पत्र’ नहीं है बल्कि भाजपा रूपी डूबते जहाज को छोड़कर विपक्ष से आगामी चुनावों में टिकट पाने के लिए ‘आवेदन पत्र’ है।हमारे गठबंधन में ऐसे नेताओं के लिए कोई जगह नहीं है, जो जनता को दुख-दर्द और दिक्कतों के सिवा कुछ नहीं देते हैं। इस जानलेवा गर्मी में परिवारों में बड़े बुज़ुर्गों, बीमारों, बच्चों और खाने-पानी की व्यवस्था में झुलसती महिलाओं की क्या दुर्दशा हो रही है, ये केवल परिवारवाले ही समझ सकते हैं।
आपसी टकराहट का ख़ामियाजा जनता क्यों भुगते
कभी आपदा में अवसर ढूंढनेवालों ने, अवसर की जगह जिस ‘अफ़सर’ को ढूंढा था वो अफसर अब स्वयं आपदा साबित हो रहा है। समस्या का समाधान पूछने पर दोनों हाथ खड़ा करके नारा लगाकर बच निकलने वालों के रहते समस्या नहीं सुलझेगी। भाजपा के डबल इंजन की इस आपसी टकराहट का ख़ामियाजा जनता क्यों भुगते?किसी के लिए ये बड़ा मौका है कि वो पूरी तरह से नाकाम हो चुके किसी ‘दूत-मंत्री’ को हटा दे मतलब बहुत समय से चुभ रहे इस कांटे को निकाल दे अर्थात इस बार आपदा में वो किसी को बाहर का रास्ता दिखाने का अवसर ढूंढ ले।
अपनी राजनीति के खत्म होने पर पछतावे के आंसू भी नहीं बहा पा रहे
ऐसे में माननीय पर किसी के खिलाफ दुर्भावनावश काम करने का आरोप भी कोई नहीं लगा पाएगा। उसके बाद मुख्यमंत्री को अपना मंत्रिमंडल विस्तार करने और उन बेचारे सहानुभूति के पात्रों में से किसी एक ‘घाटहीन’ को समायोजित करने का मौका भी मिल जाएगा, जो सत्तासुख के लालच में अपनी अंतरात्मा से झूठ बोलकर भी केवल हाथ मलते रह गये हैं और अपनी राजनीति के खत्म होने पर पछतावे के आंसू भी नहीं बहा पा रहे हैं।उप्र की भाजपा सरकार भी जानती है कि अब वो कभी वापस नहीं आएगी, इसीलिए वो जनता की मुश्किलों और मांगों को पूरी तरह नजरअंदाज करके बस अपने खजाने ने भरने में लगी है।
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