लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए पुलिस और परिवहन विभाग ने संयुक्त रूप से शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ बड़ा राज्यव्यापी अभियान चलाया। पुलिस महानिदेशक Rajeev Krishna के निर्देश पर 9, 10, 16 और 17 मई 2026 को पूरे प्रदेश में विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया।
सार्वजनिक स्थलों पर व्यापक चेकिंग की
अपर पुलिस महानिदेशक यातायात के मार्गदर्शन में चलाए गए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों को कम करना और नशे में वाहन चलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करना था। अभियान के दौरान पुलिस और परिवहन विभाग की संयुक्त टीमों ने प्रदेशभर के प्रमुख मार्गों, टोल प्लाजा और सार्वजनिक स्थलों पर व्यापक चेकिंग की।
135 टोल प्लाजा पर चला सघन चेकिंग अभियान
प्रदेश के 135 टोल प्लाजा पर विशेष चेकिंग टीमें तैनात की गई थीं। प्रत्येक लेन में अलग-अलग टीमें लगाई गईं, जिन्हें ब्रेथ एनालाइजर, बॉडी वॉर्न कैमरा, टॉर्च, रिफ्लेक्टिव जैकेट और लाउड हेलर जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।इस अभियान में यातायात पुलिस, नागरिक पुलिस, महिला पुलिसकर्मी और होमगार्ड समेत कुल 3,645 अधिकारी और कर्मचारी तैनात रहे। इनमें 135 निरीक्षक, 270 उपनिरीक्षक और बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं।
2.52 लाख वाहनों की जांच, 5,143 ड्रिंक एंड ड्राइव में पकड़े गए
चार दिन चले इस अभियान के दौरान कुल 2,52,122 वाहनों की जांच की गई। जांच में 5,143 वाहन चालक शराब पीकर वाहन चलाते पाए गए, जिनके खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 के तहत कार्रवाई की गई।
करीब 7 करोड़ 70 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया
इसके अलावा मॉडिफाइड साइलेंसर लगाने वाले 4,245 वाहन चालकों, प्रेशर हॉर्न और हूटर इस्तेमाल करने वाले 4,225 लोगों तथा फर्जी नंबर प्लेट या एचएसआरपी नहीं होने पर 4,594 वाहन चालकों का चालान किया गया। कुल मिलाकर 16,128 वाहनों पर कार्रवाई करते हुए करीब 7 करोड़ 70 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
सप्ताहांत में बढ़ते हादसों पर पुलिस की चिंता
यातायात विभाग की समीक्षा में सामने आया कि वर्ष 2023, 2024 और 2025 में हुई सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या ऐसे मामलों की रही, जिनमें चालक नशे की हालत में वाहन चला रहे थे। पुलिस के अनुसार सप्ताहांत यानी शनिवार और रविवार को देर रात शराब पीकर वाहन चलाने की घटनाएं अधिक सामने आती हैं, जिससे आम लोगों की जान खतरे में पड़ती है।
महिलाओं के लिए ‘मीट एंड ग्रीट’ पहल
अभियान के दौरान महिला पुलिसकर्मियों ने परिवार के साथ यात्रा कर रही महिलाओं से बातचीत कर उनकी सुरक्षा और यात्रा संबंधी समस्याओं की जानकारी भी ली। पुलिस ने इसे “मीट एंड ग्रीट” पहल का नाम दिया, जिसका उद्देश्य यात्रियों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ाना था।
डंपर और ट्रकों की भी हुई जांच
अभियान के दौरान निर्माण सामग्री ढोने वाले डंपर और ट्रकों की हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (HSRP) का सत्यापन भी किया गया। साथ ही मॉडिफाइड साइलेंसर और तेज आवाज वाले प्रेशर हॉर्न के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की गई।
क्या है कानून?
मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 185 के अनुसार यदि किसी चालक के रक्त में अल्कोहल की मात्रा 30 mg प्रति 100 ml से अधिक पाई जाती है तो यह दंडनीय अपराध माना जाता है। पहली बार पकड़े जाने पर 10 हजार रुपये जुर्माना या 6 माह तक की जेल, जबकि दोबारा अपराध करने पर 15 हजार रुपये जुर्माना या 2 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।यातायात विभाग ने साफ किया है कि सड़क सुरक्षा को लेकर ऐसे अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।