लखनऊ। बढ़ती गर्मी के बीच बिजली की मांग में तेजी आने से व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। इस बीच विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर टकराव की नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए तत्काल संवाद शुरू करने और ठोस कार्ययोजना बनाने की मांग की है।संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि प्रबंधन कर्मचारियों को विश्वास में लेकर काम करे। इसके लिए पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष को तत्काल संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलाना चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं की समस्याओं का प्रभावी समाधान निकाला जा सके।
आंदोलन कर रहे बिजली कर्मियों पर की गई कार्रवाई वापस हो
समिति ने स्पष्ट कहा कि मार्च 2023 से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे बिजली कर्मियों पर की गई सभी अनुशासनात्मक और उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयाँ तत्काल वापस ली जानी चाहिए। उनका कहना है कि ये कार्रवाई किसी अनुशासनहीनता के कारण नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण आंदोलन के चलते की गई हैं, जिससे कार्य का माहौल प्रभावित हुआ है।संघर्ष समिति ने यह भी याद दिलाया कि मार्च 2023 की सांकेतिक हड़ताल के बाद प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने कर्मचारियों पर की गई कार्रवाई वापस लेने और हटाए गए संविदा कर्मियों को बहाल करने के निर्देश दिए थे। लेकिन तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद इन निर्देशों का पालन नहीं हुआ है।
संविदा कर्मचारियों को सेवा से बाहर रखा गया
समिति के अनुसार, कम वेतन पाने वाले संविदा कर्मचारियों को सेवा से बाहर रखा गया है, वहीं शांतिपूर्ण तरीके से सभा करने वाले कर्मचारियों पर नई कार्रवाई की गई है, जिससे असंतोष और बढ़ा है।इन मुद्दों को लेकर संघर्ष समिति ने 16 अप्रैल से प्रदेशभर में जन-जागरण अभियान शुरू किया है। इसके तहत बिजली कर्मियों को संगठित किया जा रहा है और उपभोक्ताओं को भरोसे में लेकर उनकी समस्याओं के समाधान का प्रयास किया जा रहा है।
किसी भी हालत में इसे लागू नहीं होने दिया जाएगा
समिति ने चेतावनी देते हुए कहा कि बिजली क्षेत्र के निजीकरण का विरोध जारी रहेगा और किसी भी हालत में इसे लागू नहीं होने दिया जाएगा। साथ ही कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई को वापस कराने के लिए आंदोलन तेज करने की भी बात कही गई है।फिलहाल, भीषण गर्मी के बीच बिजली व्यवस्था को लेकर प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।
