लखनऊ । उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश सरकार से इस व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच कराने और मीटरिंग का पूरा काम निजी कंपनियों से वापस लेकर विभागीय नियंत्रण में देने की मांग की है।

निजी कंपनियों पर गंभीर आरोप

संघर्ष समिति का कहना है कि एडवांस्ड मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (AMI) के तहत मीटर खरीद, स्थापना, रीडिंग और रखरखाव का काम निजी कंपनियों को सौंप दिया गया है। इन कंपनियों को AMISP के रूप में नियुक्त किया गया है, जो केंद्र सरकार की आरडीएसएस योजना के तहत मिले फंड से करोड़ों रुपये के मीटर खरीदकर पूरी व्यवस्था चला रही हैं। समिति का आरोप है कि यह व्यवस्था उपभोक्ता हित में नहीं बल्कि निजी कंपनियों के लाभ के लिए काम कर रही है।

उपभोक्ताओं को हो रही दिक्कतें

संघर्ष समिति ने बताया कि प्रदेश में लगे स्मार्ट मीटरों में लगातार तकनीकी खराबी, गलत बिलिंग, रिचार्ज के बावजूद बिजली आपूर्ति बाधित होना और शिकायतों के समाधान में लापरवाही जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। खासतौर पर प्रीपेड सिस्टम के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं को बार-बार बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार से की गई मांगें

समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि—

स्मार्ट मीटर व्यवस्था की तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराई जाए

मीटरिंग का कार्य निजी कंपनियों से वापस लेकर विभागीय नियंत्रण में दिया जाए

नए स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया फिलहाल रोकी जाए

पहले से लगे मीटरों की स्वतंत्र जांच कराई जाए

उपभोक्ताओं की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए

राजस्व पर भी असर की चिंता

संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि मीटरिंग व्यवस्था बिजली निगम के राजस्व का मुख्य आधार है, लेकिन इसे निजी कंपनियों को सौंपने से राजस्व संग्रहण पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। इससे बिजली निगम की आर्थिक स्थिति कमजोर होने का खतरा बढ़ रहा है।

आंदोलन की चेतावनी

समिति ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार और ऊर्जा प्रबंधन की होगी।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *