नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र में देश की राजनीति और चुनावी व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा में केंद्र सरकार ने अहम कदम उठाते हुए महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए। नई दिल्ली में पेश इन विधेयकों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
देश में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 सदन में पेश किए, जबकि गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 प्रस्तुत किया। इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य देश में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना और लोकसभा सीटों का पुनर्निर्धारण करना है।
क्या है प्रस्ताव
प्रस्तावित संशोधन के तहत लोकसभा की कुल सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान किया गया है। इसमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें निर्धारित की जाएंगी। परिसीमन प्रक्रिया के बाद सीटों का अंतिम निर्धारण होगा। इसी के साथ लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाने का प्रस्ताव है।
विपक्ष का विरोध
विधेयकों के पेश होते ही विपक्ष ने इसका विरोध शुरू कर दिया। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर संविधान के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया। वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण में शामिल किए बिना यह कानून अधूरा है।
इस मुद्दे पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को सभी वर्गों की महिलाओं के लिए स्पष्ट प्रावधान करना चाहिए।
सरकार का जवाब
गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना असंवैधानिक है और सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी। उन्होंने विपक्ष को सुझाव दिया कि यदि वे चाहें तो अपने दलों में मुस्लिम महिलाओं को टिकट देकर प्रतिनिधित्व बढ़ा सकते हैं।
आगे की प्रक्रिया
संसद में इन विधेयकों पर विस्तृत चर्चा जारी है। माना जा रहा है कि यह विधेयक भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ चुनावी ढांचे में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। हालांकि, परिसीमन और सीटों के पुनर्वितरण को लेकर राजनीतिक सहमति बनना अभी भी चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है।
