कानपुर । यूपी में कानपुर के आरटीओ कार्यालय में फर्जीवाड़े का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक मृत व्यक्ति को कागजों में जिंदा दिखाकर उसकी कार दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर कर दी गई। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब मृतक की पत्नी खुद गाड़ी ट्रांसफर रुकवाने के लिए आरटीओ कार्यालय पहुंची।

गाड़ी ट्रांसफर के लिए ऑनलाइन आवेदन भी किया

जानकारी के मुताबिक, पी रोड निवासी डिंपल केसरवानी के पति कपिल मेहरोत्रा ने दिसंबर 2025 में कल्याणपुर निवासी एक व्यक्ति को अपनी क्रेटा कार 4.25 लाख रुपये में बेचने का सौदा किया था। गाड़ी ट्रांसफर के लिए ऑनलाइन आवेदन भी किया गया था, लेकिन इसी बीच कपिल की अचानक मौत हो गई, जिससे प्रक्रिया अधूरी रह गई।

गाड़ी ट्रांसफर पर रोक लगाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया

पति की मौत के बाद डिंपल केसरवानी ने आरटीओ कार्यालय में गाड़ी ट्रांसफर पर रोक लगाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। उनका आरोप है कि खरीदार ने पूरी रकम भी अदा नहीं की थी। इसके बावजूद, करीब तीन महीने तक चक्कर लगाने के बाद उन्हें पता चला कि कार पहले ही किसी अन्य व्यक्ति के नाम ट्रांसफर हो चुकी है।

दलाल, बाबू और प्राइवेट कर्मचारी पर आरोप

सूत्रों के अनुसार, कार खरीदने वाले व्यक्ति ने एक दलाल के माध्यम से आरटीओ के बाबू ऋषभ वर्मा से सांठगांठ की। इसके बाद कार्यालय में कार्यरत प्राइवेट कर्मचारी अमित मेहरोत्रा की मदद से फाइल रिकॉर्ड से निकलवाई गई और मृतक कपिल मेहरोत्रा को कागजों में जिंदा दिखाकर फर्जी हस्ताक्षर किए गए। इसी आधार पर वाहन को दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर कर दिया गया।इस फर्जीवाड़े की जानकारी न तो मृतक के परिजनों को हुई और न ही विभागीय अधिकारियों को इसकी भनक लग सकी।

पुलिस जांच में जुटी, कर्मचारी से पूछताछ

मामले की जानकारी मिलने पर महिला ने काकादेव थाना में तहरीर देकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने आरटीओ कार्यालय से जुड़े प्राइवेट कर्मचारी अमित मेहरोत्रा को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।थाना प्रभारी राजेश कुमार ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं पर पड़ताल की जा रही है। जल्द ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विभागीय जांच भी शुरू

एआरटीओ आलोक कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच जारी है। उन्होंने कहा कि मृतक द्वारा पहले वाहन बिक्री के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन उसके बाद किस तरह फर्जीवाड़ा हुआ, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।आरटीओ कार्यालय में इस तरह का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब पुलिस और परिवहन विभाग की जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ पाएगी।

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