लखनऊ। अपराध नियंत्रण के लिए अहम माने जाने वाले नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (नेटग्रिड) के उपयोग में उत्तर प्रदेश की स्थिति कमजोर पाई गई है। Ministry of Home Affairs ने इस पर नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार और पुलिस विभाग को इसके इस्तेमाल को बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। वर्तमान में उत्तर प्रदेश इस मामले में देश में 15वें स्थान पर है।
नेटग्रिड के प्रभावी उपयोग के आदेश जारी
केंद्र के निर्देश के बाद Uttar Pradesh Police के डीजीपी ने सभी पुलिस अधिकारियों को नेटग्रिड के प्रभावी उपयोग के आदेश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद, संगठित अपराध, साइबर अपराध, नकली नोट और मादक पदार्थों के नेटवर्क पर नजर रखने के लिए इस प्लेटफॉर्म का नियमित इस्तेमाल जरूरी है।
नेटग्रिड के सक्रिय यूजर्स की संख्या बढ़ाई जाए
डीजीपी ने निर्देश दिए हैं कि जिला स्तर तक नेटग्रिड के सक्रिय यूजर्स की संख्या बढ़ाई जाए और सभी अधिकारियों को इसके उपयोग का प्रशिक्षण दिया जाए। साथ ही, हर क्राइम मीटिंग में इसके उपयोग की समीक्षा भी की जाए, ताकि जांच और खुफिया सूचनाओं को और तेज व प्रभावी बनाया जा सके।
लापरवाही मिलने पर अधिकारियों पर गिरेगी गाज
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।नेटग्रिड एक केंद्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो 11 केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस को रियल-टाइम जानकारी उपलब्ध कराता है। इसके माध्यम से अपराधियों की गतिविधियों, नेटवर्क और संदिग्ध लेन-देन पर नजर रखना आसान हो जाता है।
ये भी दिए गए अहम निर्देश
सोशल मीडिया निगरानी के लिए सुदर्शन पोर्टल का अधिक उपयोग
साइबर अपराध, फरार अपराधियों और गुमशुदा व्यक्तियों की तलाश में गाण्डीव पोर्टल को बढ़ावा
सर्किल, कमिश्नरेट और जनपद स्तर पर यूजर आईडी बनाकर उन्हें सक्रिय रखना
