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हाईटेक हुई Lucknow पुलिस: मोबाइल डाटा विश्लेषण प्रशिक्षण से साइबर अपराधियों पर कसेगा शिकंजा

लखनऊ। राजधानी पुलिस ने साइबर अपराधों की जांच को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए “मोबाइल डाटा विश्लेषण” विषय पर विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यशाला रिजर्व पुलिस लाइन्स स्थित संगोष्ठी सदन में आयोजित की गई, जिसमें पुलिसकर्मियों को आधुनिक तकनीकों की बारीकियों से अवगत कराया गया।

इनके निर्देशन में हुआ प्रशिक्षण

यह कार्यक्रम पुलिस आयुक्त अमरेन्द्र कुमार सेंगर के निर्देशन में आयोजित हुआ, जिसमें संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) अपर्णा कुमार, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) बबलू कुमार और पुलिस उपायुक्त (अपराध) अनिल कुमार यादव के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण संपन्न कराया गया। कार्यशाला का संचालन सहायक पुलिस आयुक्त (महिला अपराध/ट्रेनिंग सेल) सौम्या पाण्डेय के पर्यवेक्षण में हुआ।

97 पुलिसकर्मियों ने लिया प्रशिक्षण

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के विभिन्न थानों के साइबर हेल्प डेस्क प्रभारी समेत करीब 97 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। प्रशिक्षण का उद्देश्य पुलिस कर्मियों की तकनीकी दक्षता को बढ़ाना और साइबर अपराधों की विवेचना को अधिक सटीक व प्रभावी बनाना था।

डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण पर जोर

कार्यशाला में मुख्य प्रशिक्षक के रूप में विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) के वैज्ञानिक अधिकारी नरेंद्र कुमार ने मोबाइल डाटा विश्लेषण के विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कॉल डिटेल, मैसेज, ऐप डाटा, लोकेशन हिस्ट्री और डिजिटल फुटप्रिंट जैसे साक्ष्य अपराधों के खुलासे में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं।

फोरेंसिक टूल्स और तकनीक की दी जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को एफटीके (FTK) जैसे डिजिटल फोरेंसिक टूल्स के उपयोग, हैश वैल्यू की भूमिका, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के सुरक्षित संकलन और न्यायालय में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया के बारे में भी विस्तार से बताया गया।

साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण की तैयारी

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से पुलिस बल को आधुनिक तकनीकी ज्ञान मिलता है, जिससे साइबर अपराधों के त्वरित और सटीक खुलासे में मदद मिलती है।लखनऊ पुलिस द्वारा भविष्य में भी डिजिटल फोरेंसिक, साइबर जांच और आधुनिक तकनीकों पर इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है, ताकि पुलिस को और अधिक सक्षम और तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जा सके।

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