लखनऊ । विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कैप्टिव पावर से संबंधित इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 पर गहरी चिंता जताई है। समिति का कहना है कि इन संशोधित नियमों से देश की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की वित्तीय स्थिति पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के अनुसार नए नियमों में कैप्टिव पावर की परिभाषा और दायरा काफी व्यापक कर दिया गया है। इससे बड़े औद्योगिक उपभोक्ता डिस्कॉम से बिजली खरीदने के बजाय अपने कैप्टिव स्रोतों से बिजली लेना शुरू कर सकते हैं, जिससे वितरण कंपनियों की बिजली बिक्री में भारी गिरावट आने की आशंका है।

कैप्टिव उपभोक्ता मानने का प्रावधान किया गया

उन्होंने बताया कि डिस्कॉम की आय का बड़ा हिस्सा औद्योगिक उपभोक्ताओं से आता है, क्योंकि वे अपेक्षाकृत अधिक टैरिफ पर बिजली लेते हैं। इसी आय से घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को क्रॉस-सब्सिडी दी जाती है। यदि उद्योग बड़ी संख्या में कैप्टिव पावर की ओर चले जाते हैं तो यह पूरी व्यवस्था कमजोर पड़ जाएगी और डिस्कॉम का वित्तीय घाटा तेजी से बढ़ सकता है।संघर्ष समिति ने कहा कि नए नियमों में होल्डिंग कंपनियों, उनकी सहायक कंपनियों और ग्रुप कंपनियों को भी कैप्टिव उपभोक्ता मानने का प्रावधान किया गया है।

वितरण कंपनियों के राजस्व को प्रभावित करेगा

इससे बड़े कॉरपोरेट समूह अपनी विभिन्न कंपनियों के माध्यम से कैप्टिव बिजली का व्यापक उपयोग कर सकेंगे और डिस्कॉम से बिजली खरीद में भारी कमी आ सकती है।इसके अलावा एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स (AoP) और स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) के माध्यम से कैप्टिव प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया को और अधिक लचीला बनाया गया है, जिससे कंपनियों के लिए बड़े कैप्टिव प्रोजेक्ट स्थापित करना आसान हो जाएगा।समिति ने यह भी कहा कि कैप्टिव स्टेटस के सत्यापन तक क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज और अतिरिक्त सरचार्ज न लगाए जाने का प्रावधान भी वितरण कंपनियों के राजस्व को प्रभावित करेगा और वित्तीय दबाव बढ़ाएगा।

474वें दिन बिजली कर्मियों ने सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन किया

संघर्ष समिति ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इन नियमों की व्यापक समीक्षा की जाए और वितरण कंपनियों के हितों तथा उपभोक्ताओं को सस्ती व विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराने के संतुलन को ध्यान में रखते हुए आवश्यक संशोधन किए जाएं।इस बीच Purvanchal Vidyut Vitaran Nigam Limited और Dakshinanchal Vidyut Vitaran Nigam Limited के निजीकरण के विरोध में चल रहा आंदोलन भी जारी है। संघर्ष के 474वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश के सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन किया।

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