लखनऊ । देश के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के संगठनों ने प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के खिलाफ राजधानी दिल्ली में बड़ा विरोध दर्ज कराया। कांस्टीट्यूशन क्लब में नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स (NCCOEEE) की ओर से आयोजित राष्ट्रीय कन्वेंशन में विभिन्न राजनीतिक दलों के 11 सांसदों ने हिस्सा लिया और संसद में इस विधेयक का कड़ा विरोध करने का आश्वासन दिया।कन्वेंशन में सांसदों ने एक स्वर में कहा कि प्रस्तावित बिजली संशोधन विधेयक गरीब और घरेलू उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार इसे संसद में पारित कराने की कोशिश करती है, तो लोकतांत्रिक तरीके से इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।

इन्होंने बिजली कर्मचारियों के आंदोलन को समर्थन दिया

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सांसद संजय सिंह, मनोज झा, मल्लू रवि, आमरा राम, पी. विल्सन, पी. संतोष कुमार, वी. शिवदासन, जॉन ब्रिटास, के. राधाकृष्णन, रविचंद्रन और सच्चिदानंदन मौजूद रहे। इसके अलावा पूर्व सांसद तपन सेन और उदित राज भी सम्मेलन में शामिल हुए और बिजली कर्मचारियों के आंदोलन को समर्थन दिया।कन्वेंशन की शुरुआत में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन और विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रस्तावित बिजली संशोधन विधेयक का मुख्य उद्देश्य कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाना है।

यह विधेयक आम जनता के हितों के विरुद्ध

उन्होंने कहा कि यह विधेयक गरीब उपभोक्ताओं, किसानों, बिजली कर्मचारियों और आम जनता के हितों के विरुद्ध है।कोऑर्डिनेशन कमेटी के कन्वीनर संदीप दत्ता ने एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से सांसदों को बताया कि यदि यह विधेयक लागू होता है तो बिजली वितरण व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा और उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।सम्मेलन में मौजूद सभी सांसदों ने कहा कि यह विधेयक किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि केंद्र सरकार इसे संसद में जबरन पारित कराने का प्रयास करती है, तो इसे रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।

पूर्व सांसद उदित राज ने भी इस विधेयक का किया विरोध

पूर्व सांसद उदित राज ने भी इस विधेयक के विरोध में अपना समर्थन व्यक्त करते हुए कहा कि आम जनता को प्रभावित करने वाले इस मुद्दे पर व्यापक सामाजिक जागरूकता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बिजली कर्मचारियों के आंदोलन को समाज के सभी वर्गों का समर्थन मिलना चाहिए।राष्ट्रीय कन्वेंशन के दौरान इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के विरोध में एक प्रस्ताव भी पारित किया गया, जिसका सभी उपस्थित सांसदों ने समर्थन किया।कार्यक्रम के अंत में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के सेक्रेटरी जनरल पी. रत्नाकर राव ने सभी सांसदों और संगठनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बिजली कर्मचारी और इंजीनियर इस जनविरोधी विधेयक के खिलाफ देशभर में जनता के बीच संघर्ष जारी रखेंगे।

बिजली कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे

इस दौरान विभिन्न बिजली कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। इनमें इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष सुभाष लांबा, ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज के डिप्टी जनरल सेक्रेटरी कृष्णा भोयूर, मोहम्मद समीउल्लाह और ऑल इंडिया पावर मेंस फेडरेशन के आर.के. पाराशर शामिल रहे। सभी वक्ताओं ने व्यापक जनहित में इस विधेयक का विरोध करने का आह्वान किया।वहीं, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 469वें दिन भी बिजली कर्मियों ने प्रदेश के सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन जारी रखा और सरकार से प्रस्तावित बिजली संशोधन विधेयक को वापस लेने की मांग दोहराई।

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