लखनऊ। लोकसभा में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 पेश करने की केंद्र सरकार की योजना के विरोध में देशभर के लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी 10 मार्च को अपने कार्यस्थलों से बाहर आकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उत्तर प्रदेश में भी बिजली कर्मी अपने-अपने बिजलीघरों और कार्यालयों के बाहर बिल के खिलाफ जोरदार विरोध करेंगे।

पूरी बिजली क्षेत्र का निजीकरण करना चाहती है सरकार

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लाइज एंड इंजीनियर्स (NCCOEEE) द्वारा 10 मार्च को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें सांसदों को यह अवगत कराया जाएगा कि बिल किसान विरोधी, कर्मचारी विरोधी और उपभोक्ता विरोधी है। इस बिल के लागू होने पर बिजली दरों में भारी वृद्धि होने की आशंका है और केंद्र सरकार पूरे बिजली क्षेत्र का चरणबद्ध निजीकरण करना चाहती है।

यह आंदोलन पिछले 467 दिनों से लगातार जारी

संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि अगर बिल पारित करने की कोशिश की गई तो राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी। लखनऊ में 10 मार्च को अपराह्न 1:00 बजे पारेषण भवन पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा, जिसमें शहर के सभी बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर और इंजीनियर भाग लेंगे।संघर्ष समिति ने प्रदेश के बिजली कर्मियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में विरोध प्रदर्शन में भाग लें और इस जनविरोधी बिल के खिलाफ अपनी एकजुटता और शक्ति का प्रदर्शन करें। यह आंदोलन पिछले 467 दिनों से लगातार जारी है।

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