लखनऊ । देहरादून में 08 मार्च को All India Power Engineers Federation (एआईपीईएफ) की राष्ट्रीय कार्य समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में केंद्र सरकार द्वारा संसद के बजट सत्र में लाए जा रहे Electricity (Amendment) Bill 2025 और देश में बढ़ते बिजली निजीकरण के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।

राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक में व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा

फेडरेशन के चेयरमैन Shailendra Dubey और सेक्रेटरी जनरल P. Ratnakar Rao ने जानकारी दी कि 10 मार्च को संसद में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 पेश किए जाने की खबर से देशभर के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों में भारी नाराजगी है। इसी मुद्दे को लेकर देहरादून में हो रही राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक में व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा और आगे की रणनीति तय की जाएगी।

बिजली क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा

फेडरेशन के पदाधिकारियों के अनुसार बैठक में National Electricity Policy 2026 के प्रस्तावित प्रावधानों और बिजली क्षेत्र में निजीकरण की प्रक्रिया पर भी चर्चा होगी। संगठन का कहना है कि इन नीतियों के माध्यम से बिजली क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे बिजली उपभोक्ताओं, किसानों, कर्मचारियों और इंजीनियरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।फेडरेशन ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता को विभिन्न शर्तों से जोड़ना भी चिंता का विषय है। इस मुद्दे पर भी राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक में विस्तार से चर्चा की जाएगी।

कई राज्यों के प्रतिनिधि पहले ही वहां पहुंच चुके

बैठक में देश के लगभग 18 राज्यों से विद्युत अभियंता संघों के अध्यक्ष, महासचिव और अन्य पदाधिकारी भाग लेने के लिए देहरादून पहुंच रहे हैं। कई राज्यों के प्रतिनिधि पहले ही वहां पहुंच चुके हैं।इस बैठक में Sanjay Singh Chauhan और Singh Gurjar भी विशेष रूप से शामिल हो रहे हैं।फेडरेशन का कहना है कि बिजली क्षेत्र में निजीकरण की नीतियां कर्मचारियों और इंजीनियरों के साथ-साथ किसानों और आम बिजली उपभोक्ताओं के हितों के लिए भी गंभीर चुनौती पैदा कर सकती हैं। इसलिए देहरादून की इस बैठक में राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने पर भी चर्चा की जाएगी।

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