कानपुर। यूपी के कानपुर में नजीराबाद थाना पुलिस और साइबर क्राइम ब्रांच ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो युवाओं को लोन दिलाने का झांसा देकर उनके दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्म बनाकर बड़े पैमाने पर जीएसटी चोरी और संदिग्ध लेनदेन कर रहा था। प्रारंभिक जांच में करीब 250 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। अब तक 38 बोगस फर्मों का नेटवर्क चिन्हित किया गया है।
ऐसे फंसाए जाते थे युवक
पुलिस कमिश्नरेट के अनुसार, गिरोह के सदस्य लोन की तलाश में भटक रहे युवाओं से संपर्क करते थे। उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और बिजली बिल जैसे दस्तावेज ले लिए जाते थे। इसके बाद उन्हीं दस्तावेजों पर बैंक खाते खुलवाए जाते और किरायानामा बनाकर फर्म का पंजीकरण करा दिया जाता। ओटीपी और मोबाइल नंबर भी गिरोह के नियंत्रण में रहते थे, जिससे असली दस्तावेज धारक को भनक तक नहीं लगती थी।
करोड़ों का खेल
जांच में सामने आया कि उन्नाव निवासी एक युवक के नाम पर बनाई गई फर्म के खाते में छह महीने के भीतर करीब 117 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ, जबकि बड़ी रकम नकद निकाली गई। इसी तरह आरके नगर निवासी एक अन्य युवक के खाते से 72 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन पाया गया। कई अन्य फर्मों के जरिए भी करोड़ों रुपये इधर-उधर किए गए।
कैसे होता था जीएसटी खेल
अधिकारियों के मुताबिक, मुख्य कारोबारी फर्में कमीशन के बदले फर्जी फर्मों के जरिए कागजों में माल की खरीद-फरोख्त दिखाती थीं। रकम बोगस फर्मों के खातों में ट्रांसफर की जाती, वहां से नकद निकालकर कमीशन काटकर वापस पहुंचा दी जाती। इस तरीके से जीएसटी देनदारी कम दिखाई जाती थी और वास्तविक कारोबारी बच निकलते थे।
गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई
पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 30 मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनमें बैंकिंग और फर्म पंजीकरण से जुड़े अहम डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। मामले की विस्तृत रिपोर्ट जीएसटी विभाग को भेज दी गई है, ताकि टैक्स चोरी की सटीक राशि का आकलन कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा सके।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क कई जिलों तक फैला हो सकता है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव हैं।
