लखनऊ/ वाराणसी । शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने केदार घाट, उत्तर प्रदेश स्थित अपने मठ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन सभी आरोपों को पूरी तरह झूठा और निराधार बताया जो उनके खिलाफ लग रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें आशंका है कि पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर जेल में जहर की सुई देकर मार सकती है।
अग्रिम जमानत पर फैसले की बात
शंकराचार्य ने बताया कि वे स्वयं अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन आश्रम से जुड़े लोगों की भावनाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया। उनका कहना था कि आरोप मनगढ़ंत और झूठे हैं। उन्होंने बताया, “एक आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति झूठी कहानी गढ़कर इसे लोगों के सामने रख देता है और इसी आधार पर पूरे मामले को आगे बढ़ाया जाता है।”
जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जांच टीम अपना काम कर रही है, लेकिन आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा प्रेस वार्ता कर रिपोर्ट मीडिया के सामने पेश की जा रही है। उन्होंने सवाल किया, “यदि जांच टीम की रिपोर्ट एक हिस्ट्रीशीटर सार्वजनिक कर रहा है, तो पुलिस क्या कर रही है?” उन्होंने यह भी कहा कि कानूनन पॉक्सो एक्ट से जुड़ी रिपोर्ट सामान्यतः सार्वजनिक नहीं की जाती।
आश्रम की पारदर्शिता और सुरक्षा
मठ के ‘शीश महल’ और पांच मंजिला भवन से जुड़ी चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी वस्तु छिपाई नहीं गई है। स्वामी के अनुसार, शीशा लगा होना बुराई नहीं है, बल्कि यह पारदर्शिता के लिए है। उन्होंने कहा कि यदि कोई आश्रम को ऊपर तक देखना चाहता है, तो बिना कैमरे के पूरा परिसर देखने की अनुमति दी जा सकती है। लेकिन छात्र और निवासियों की सुरक्षा के लिए कैमरे के साथ प्रवेश की अनुमति सीमित रखी गई है।
आरोपों को पीछे का ध्यान भटकाने वाला मामला बताया
शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि देश के कानून, न्यायपालिका और सरकारों का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एपस्टीन फाइल मामले में देश के कई बड़े लोगों के नाम शामिल हैं और उनकी बदनामी कर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया कि आश्रम और उसके परिसर में कोई छिपा हुआ नहीं है और पूरी स्थिति पारदर्शिता और सुरक्षा के दायरे में रखी जा रही है।
