वाराणसी। रविवार की शाम बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने केदारघाट स्थित विद्या मठ में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने शंकराचार्य का आशीर्वाद लिया और मीडिया से रूबरू हुए। अग्निहोत्री ने कहा कि यह मुलाकात किसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा नहीं है, बल्कि एक शुभ संयोग और सामाजिक परिस्थितियों पर चर्चा का अवसर था।
उनका संघर्ष कभी राज्य सरकार से नहीं था
अग्निहोत्री ने एससी/एसटी एक्ट को देश का सबसे बड़ा काला कानून बताया और कहा कि इसके तहत दर्ज करीब 95 प्रतिशत मामले फर्जी होते हैं, जिससे समाज के बड़े वर्ग को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार 6 फरवरी तक इस एक्ट में बदलाव नहीं करती, तो उन्हें ‘चार्टर्ड प्लेन में बिठाकर गुजरात वापस भेज दिया जाएगा’।पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष कभी राज्य सरकार से नहीं था, बल्कि केंद्र सरकार से था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह राज्य सरकार को अस्थिर करने के प्रयास में भेदभाव कर रहे हैं और राज्य प्रशासन दबाव में काम कर रहा है।
गंभीर सामाजिक परिणामों के प्रति चेतावनी भी दी
अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे का कारण भी बताया। उन्होंने कहा कि माघ मेले में सनातन संस्कृति के प्रतीकों का अपमान होते देख वह इसे बर्दाश्त नहीं कर सके और इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही उन्होंने UGC 2026 के नए रेगुलेशन पर रोक लगने के बाद जाति-आधारित भेदभाव के संस्थागत दुरुपयोग और इसके गंभीर सामाजिक परिणामों के प्रति चेतावनी भी दी।उन्होंने कहा कि जाति-आधारित भेदभाव को कभी संस्थागत हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, और इसे केवल उचित संवाद और शब्दावली तक सीमित रखा जाना चाहिए।
