संजीव सिंह, बलिया। बलिया लोकसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के सांसद सनातन पांडेय शुक्रवार को फेफना क्षेत्र में आयोजित रेलवे के एक कार्यक्रम को लेकर खासे नाराज नजर आए। उन्होंने खुले मंच से अफसरों को चेतावनी दे डाली। फेफना क्षेत्र में हुए रेलवे कार्यक्रम में मुख्य अतिथि न बनाए जाने पर सांसद ने तीखा हमला बोलते हुए कहा— “अधिकारी अगर काम नहीं करेंगे तो जूते नहीं खाएंगे क्या? मुझ पर जितने मुकदमे करने हों कर लो, झेलने के लिए तैयार हूं।

दो ट्रेनों के ठहराव को लेकर एक कार्यक्रम हुआ था

दरअसल, फेफना रेलवे स्टेशन पर दो ट्रेनों के ठहराव को लेकर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के आयुष मंत्री दयाशंकर दयालु, जो बलिया के प्रभारी मंत्री भी हैं, को मुख्य अतिथि बनाया गया था। हालांकि अपरिहार्य कारणों का हवाला देते हुए वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। इसके बाद भाजपा के राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शिरकत की।

कार्यक्रम में स्वयं को आमंत्रित न किए जाने से खपा

कार्यक्रम में स्वयं को आमंत्रित न किए जाने से सपा सांसद सनातन पांडेय खासे आक्रोशित दिखे। अगले दिन फेफना क्षेत्र के बघेजी गांव में आयोजित एक जनसभा के दौरान उन्होंने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। सांसद ने कहा कि देश में जब भी केंद्र सरकार की कोई परियोजना किसी क्षेत्र में आती है, तो वहां के लोकसभा सांसद को मुख्य अतिथि बनाना एक स्थापित परंपरा है, चाहे वह सत्तापक्ष से हो या विपक्ष से।

मौजूदा सरकार ने एक बार फिर अपनी कार्यशैली उजागर कर दी

सनातन पांडेय ने कहा कि मौजूदा सरकार ने एक बार फिर अपनी कार्यशैली उजागर कर दी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उम्र भले ही अधिक हो गई हो, लेकिन उनके विचार और आत्मसम्मान आज भी उतने ही मजबूत हैं। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि उनका मन करता था कि वह कार्यक्रम में जाकर विरोध दर्ज कराएं, लेकिन उन्होंने संयम बरता।सपा सांसद ने यह भी कहा कि लोग उन्हें झगड़ालू कहने लगे हैं, लेकिन वह इसे अपने हक और सम्मान की लड़ाई मानते हैं।

बलिया की सियासत एक बार फिर गरमा गई

उनका कहना था कि सांसद की उपेक्षा केवल व्यक्ति की नहीं, बल्कि जनता के जनादेश की अनदेखी है।इस पूरे घटनाक्रम के बाद बलिया की सियासत एक बार फिर गरमा गई है और रेलवे कार्यक्रम में प्रोटोकॉल को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अब सवाल यही है—क्या सांसद की अनदेखी सियासी भूल थी या जानबूझकर किया गया अपमान?

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