एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ ।वर्ष 2025 लखनऊ पुलिस के लिए उपलब्धियों और भरोसे का वर्ष साबित हुआ। प्रवर्तन, आधुनिक तकनीक और प्रभावी न्यायिक पैरवी के समन्वय से पुलिस कमिश्नरेट ने न सिर्फ संगठित अपराधों पर मजबूत नियंत्रण स्थापित किया, बल्कि राजधानी को ‘भयमुक्त’ बनाने के अपने लक्ष्य को भी काफी हद तक हासिल किया। मिशन शक्ति, स्मार्ट पुलिसिंग और जीरो टॉलरेंस नीति के तहत महिला सुरक्षा, साइबर अपराध नियंत्रण, यातायात सुधार और माफिया विरोधी अभियान में ऐतिहासिक कामयाबी दर्ज की गई।

जघन्य अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण

लखनऊ पुलिस की सख्त रणनीति का असर जघन्य अपराधों पर साफ दिखाई दिया। पिछले वर्ष की तुलना में हत्या जैसे गंभीर अपराधों में कमी दर्ज की गई। हत्या के मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए कुल 525 अभियुक्तों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया। वहीं, तीन शातिर अपराधियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कठोर कार्रवाई की गई।

पुलिस की सशक्त गश्त और निवारक रणनीति का ही परिणाम रहा कि वर्ष 2025 में डकैती की एक भी घटना दर्ज नहीं हुई, जिसे ‘Zero Dacoity’ की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इसके साथ ही 110 इनामी अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 55 को मुठभेड़ के दौरान दबोचा गया। मुठभेड़ में घायल हुए तीन अभियुक्तों की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई।

माफिया और संगठित अपराध पर कड़ा प्रहार

पुलिस आयुक्त अमरेंद्र कुमार सेंगर ने बताया कि माफिया नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए गैंगस्टर एक्ट के तहत 41 अभियोगों में 196 अभियुक्तों के खिलाफ कार्रवाई की गई। वहीं, धारा 14(1) के अंतर्गत 16 अभियुक्तों की करीब 4.90 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति कुर्क की गई। वर्ष 2020 से अब तक कुल 2,21,65,14,271.63 रुपये की अवैध संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं।इसके अलावा, 217 शातिर अपराधियों को गुंडा एक्ट के तहत जिलाबदर किया गया, जिससे संगठित अपराधियों में भय और आम नागरिकों में भरोसा कायम हुआ।

ऑपरेशन कन्विक्शन: त्वरित न्याय की मिसाल

लखनऊ पुलिस की सशक्त पैरवी का नतीजा रहा कि 829 अपराधियों को न्यायालय से सजा दिलाई जा सकी। महिलाओं और बालिकाओं से जुड़े गंभीर मामलों में विशेष ध्यान देते हुए 139 अभियुक्तों को दंडित कराया गया। इनमें से एक अपराधी को मृत्युदंड (फांसी) और 46 अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, जो अपराधियों के लिए कड़ा संदेश है।

मिशन शक्ति 5.0 और पिंक पुलिसिंग से महिला सशक्तिकरण

महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जिले में 99 पिंक बूथ पूरी तरह क्रियाशील किए गए। हर थाने पर मिशन शक्ति केंद्र स्थापित कर 53 विशेष CUG नंबर जारी किए गए, जिससे महिलाएं सीधे पुलिस से संपर्क कर सकें।यूपी-112 के माध्यम से 80,735 महिला संबंधी शिकायतों पर औसतन 08 मिनट के रिस्पॉन्स टाइम में कार्रवाई की गई। पिंक बूथ और महिला बीट प्रभारियों द्वारा 53,244 स्थानों पर 2,96,340 लोगों को जागरूक किया गया।

साइबर सेल की तकनीकी सफलता

डिजिटल अपराधों से निपटने में साइबर सेल ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई। प्राप्त 6,456 शिकायतों में 90 प्रतिशत का निस्तारण किया गया। साइबर ठगी के शिकार नागरिकों के ₹11.68 करोड़ सुरक्षित (रिफंड व फ्रीज) कराए गए।भविष्य में अपराध रोकने के लिए 10,000 से अधिक संदिग्ध मोबाइल नंबर और IMEI ब्लॉक कराए गए, वहीं सोशल मीडिया और डार्क वेब की सतत निगरानी से आपत्तिजनक अकाउंट हटवाए गए।

यातायात पुलिसिंग से सुधरी व्यवस्था

यातायात नियमों के उल्लंघन पर 11,64,061 वाहनों का चालान और नो-पार्किंग में खड़े 2,62,373 वाहनों पर कार्रवाई की गई। स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, 42 रेसर मोबाइल, वन-वे और डायवर्जन व्यवस्था से शहर की यातायात व्यवस्था सुचारू बनी रही।ब्लैक स्पॉट्स को चिन्हित कर सुरक्षा सुधार किए गए और हाईवे पर तेज रफ्तार व गलत दिशा में वाहन चलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की गई।

वीवीआईपी और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों का सफल प्रबंधन

वर्ष 2025 में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के लखनऊ आगमन कार्यक्रमों को पूरी तरह सुरक्षित और सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया।इसके अलावा, नेशनल स्काउट गाइड जम्बूरी, अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट मैच, भारत-दक्षिण अफ्रीका T-20, IPL 2025 के 8 मैच, और UP T-20 लीग का त्रुटिरहित सुरक्षा प्रबंधन किया गया। लाखों दर्शकों की मौजूदगी के बावजूद यातायात और सुरक्षा व्यवस्था सुचारू बनी रही।

नशा मुक्त लखनऊ अभियान

युवाओं को नशे से बचाने के लिए त्रि-स्तरीय रणनीति अपनाई गई। NDPS एक्ट के तहत 145 तस्कर गिरफ्तार किए गए और करोड़ों रुपये के नशीले पदार्थ बरामद हुए। अवैध शराब के मामलों में 187 अभियुक्तों की गिरफ्तारी और 31,000 लीटर से अधिक शराब की बरामदगी की गई।

सत्यापन और निवारक कार्रवाई

ऑपरेशन पहचान के तहत 13,488 किरायेदारों का शत-प्रतिशत सत्यापन किया गया। UPCOP App और ऑनलाइन पोर्टल से सत्यापन प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बनाया गया, ताकि अपराधियों द्वारा पहचान छुपाकर रहने की संभावना खत्म की जा सके।

भरोसे और सुरक्षा की ओर मजबूत कदम

लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के अनुरूप कार्य करते हुए यह साबित किया कि सख्त कानून व्यवस्था, प्रभावी पैरवी और जन-केंद्रित पुलिसिंग से अपराध पर नियंत्रण संभव है।वर्ष 2025 की यह रिपोर्ट न केवल पुलिस की कार्यकुशलता का प्रमाण है, बल्कि नागरिकों के बीच सुरक्षा, विश्वास और सुशासन के माहौल को और मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम भी है। लखनऊ पुलिस भविष्य में भी ‘सुरक्षा, सेवा और सुशासन’ के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराती है।

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