एसएमयूपीन्यूज,प्रयागराज। संगम नगरी प्रयागराज में आगामी माघ मेला की तैयारियाँ तेज हो गई हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी संगम की पवित्र रेती पर साधु-संतों, तीर्थयात्रियों और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए तंबुओं की विशाल नगरी बसना शुरू हो चुकी है। माघ मास के इस वार्षिक आध्यात्मिक पर्व में लाखों सनातन धर्मावलंबी संगम स्नान, साधना और धर्म-अनुष्ठानों में शामिल होते हैं।

जनवरी-फरवरी माह में हर वर्ष लगता है माघ मेला

पिछले वर्ष लगे महाकुंभ ने 142 वर्षों बाद विश्वभर के श्रद्धालुओं को प्रयागराज में आकर्षित किया था और जिले की पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी प्रतिष्ठा दिलाई थी। वहीं, हर साल आयोजित होने वाला माघ मेला, कुंभ की तुलना में छोटा जरूर होता है, लेकिन इसकी आध्यात्मिक महत्ता अत्यंत विशेष मानी जाती है। कुंभ मेला 12 वर्ष में एक बार चार पवित्र स्थलों—प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक—में लगता है, जबकि माघ मेला प्रत्येक वर्ष जनवरी-फरवरी में संगम तट पर आयोजित होता है।

त्रिवेणी संगम में स्नान को पुराणों में मोक्षदायी बताया

त्रिवेणी संगम में स्नान को पुराणों में मोक्षदायी बताया गया है। श्रद्धालु संगम स्नान के बाद सबसे पहले संगम तट स्थित लेटे हुए हनुमान जी मंदिर में दर्शन-पूजन करने पहुंचते हैं, जो अपने अनोखे स्वरूप के कारण देश के विशिष्ट मंदिरों में गिना जाता है। मान्यता है कि लंका विजय के बाद हनुमान जी इसी स्थान पर विश्राम हेतु आए थे, जिसके बाद उनकी लेटी हुई प्रतिमा इसी रूप में स्थापित हो गई।

हर वर्ष साधु-संतों का लगता है डेरा

हर वर्ष की तरह इस बार भी संगम क्षेत्र में अरैल की ओर बसे आश्रम, साधु-संतों के डेरा-स्थल और सुप्रसिद्ध फलाहारी बाबा का आश्रम श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। स्नानार्थी यहां आकर दर्शन करते हैं, साधु-संतों से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और स्वयं को धन्य महसूस करते हैं।आगामी माघ मेला एक बार फिर संगम नगरी की आध्यात्मिक विरासत और सनातन संस्कृति की भव्यता को प्रदर्शित करेगा।

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