रायबरेली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को रायबरेली के ऊंचाहार में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा में पहुंचकर भगवान शिव की महिमा और सनातन परंपरा में कथाओं के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जिसे ईश्वर की भक्ति प्राप्त हो गई, उसके लिए जीवन में कुछ भी पाना असंभव नहीं है। हनुमान जी को भक्ति मिली तो वह देवताओं के लिए भी पूजनीय हो गए। इसी तरह भगवान शिव की भक्ति मनुष्य के जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग दिखाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान शिव लोककल्याण के देवता हैं। उन्होंने जिस तरह संसार के कल्याण के लिए विष को धारण किया, वह त्याग और लोकमंगल का संदेश देता है। शिव की उपासना केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में सकारात्मक सोच और सेवा की भावना को भी मजबूत करती है।
शिव भक्ति में दिखती है देश की सांस्कृतिक एकता
सीएम योगी ने कहा कि भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग हिमालय से लेकर रामेश्वरम तक देश की सांस्कृतिक एकता का प्रमाण हैं। तमिलनाडु में शिव के प्रति जो आस्था दिखाई देती है, वही भाव उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र समेत देश के दूसरे हिस्सों में भी देखने को मिलता है।
उन्होंने कहा कि काशी और प्रयागराज से लेकर देश के विभिन्न क्षेत्रों तक कथाओं के माध्यम से लोग शिव भक्ति को अपने जीवन में आत्मसात करते हैं। यही धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं भारत को एक सूत्र में जोड़ने का काम करती हैं।
कथाएं समाज को देती हैं सकारात्मक ऊर्जा
मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक कथाएं हमें कंकड़ में भी शंकर का अहसास कराती हैं। जब ऐसी कथाओं की परंपरा लगातार चलती रहेगी तो सनातन संस्कृति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। उन्होंने कहा कि सकारात्मक वातावरण समाज और राष्ट्र की ताकत बनता है।
योगी ने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। इसे कर्तव्य, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति के साथ जोड़कर देखने की आवश्यकता है। धर्म जीवन को सही दिशा देने वाली शक्ति है और समाज को एकजुट करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
विदेशी आक्रमणों के दौर में भी मजबूत रही सांस्कृतिक एकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब विदेशी आक्रांता भारत की धरती को रौंद रहे थे, तब भी कथा और धार्मिक परंपराओं के माध्यम से देश की सांस्कृतिक एकता को मजबूत बनाए रखा गया। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके सामने जब नौ रत्न बनने का प्रस्ताव रखा गया तो उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया।
योगी ने कहा कि तुलसीदास के लिए किसी विदेशी शासक को राजा मानने का प्रश्न ही नहीं था, क्योंकि उनके लिए श्रीराम ही आराध्य और राजा थे। जब धर्म और संस्कृति पर प्रहार हुए, तब रामकथा ने लोगों को जोड़ने का काम किया। रामलीला जैसी परंपराओं ने भी सांस्कृतिक और राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया।
प्रयागराज, काशी और मथुरा का बताया विशेष महत्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में समरसता की बात आती है तो प्रयागराज की याद आती है, चेतना के लिए काशी और भक्ति के लिए मथुरा का स्मरण होता है। उन्होंने कहा कि ये धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र भारत की अमूल्य थाती हैं।
उन्होंने नैमिषारण्य का उल्लेख करते हुए कहा कि ऋषियों ने वहां ज्ञान की पवित्र धारा को सुरक्षित रखा। आज कथा परंपरा के माध्यम से वही ज्ञान और संस्कार समाज तक पहुंच रहे हैं।
इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने व्यासपीठ पर पूजन किया और कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा का स्वागत किया। कथा के आयोजक और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. मनोज पांडेय ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
कार्यक्रम में मंत्री राकेश सचान, केंद्र सरकार के मंत्री बीएल शर्मा, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, एमएलसी उमेश द्विवेदी, विधायक अशोक कोरी समेत कई वरिष्ठ नेता और अधिकारी मौजूद रहे।
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