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SIR विवाद पर प्रियंका गांधी का हमला, CEC ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग

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नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर विपक्ष के हमले तेज हो गए हैं। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वायनाड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि यदि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से जुड़े आरोप सही साबित होते हैं और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई की गई, तो जिम्मेदार लोगों को पद से इस्तीफा देना चाहिए और कानूनी कार्रवाई का सामना करना चाहिए।

प्रियंका गांधी ने कहा कि यदि यह साबित होता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जानकारी थी और इसके बावजूद उन्होंने उसे रोकने के बजाय उसमें भागीदारी की, तो उन्हें पद पर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अन्य चुनाव आयुक्तों ने किसी प्रक्रिया पर आपत्ति जताई थी और इसके बावजूद कथित गड़बड़ी जारी रही, तो यह गंभीर मामला है।

’13 करोड़ नाम हटाए गए’ का दावा

प्रियंका गांधी ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र और संविधान से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। उनके मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की कथित हेराफेरी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 13 करोड़ नाम हटाए जाने का आंकड़ा विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप/दावे के संदर्भ में है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार SIR के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13 करोड़ से अधिक नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं रह गए थे। रिपोर्ट में इसे मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया से जोड़ा गया है।

‘जिम्मेदार लोगों पर कानूनी कार्रवाई हो’

प्रियंका गांधी ने कहा कि यदि चुनाव प्रक्रिया में गैरकानूनी तरीके से हस्तक्षेप किए जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सामान्य कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया से छेड़छाड़ को लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ गंभीर कृत्य बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए संस्थागत स्तर पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई है, तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। प्रियंका गांधी ने अपने बयान में इसे बेहद गंभीर अपराध बताया।

दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद

यह विवाद उस रिपोर्ट के बाद और तेज हुआ जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों का संबंध मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने, नाम जोड़ने, फॉर्म-6 में बदलाव और SIR से जुड़े कुछ फैसलों से था।

चुनाव आयोग ने मतभेद की बात खारिज की

वहीं, चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर किसी संस्थागत विभाजन या गंभीर आंतरिक मतभेद की धारणा को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि लिखित टिप्पणियां, सुझाव और आंतरिक आपत्तियां संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार SIR सहित सभी आधिकारिक निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी और सहमति से लिए गए हैं।

आयोग ने यह भी कहा है कि अलग-अलग चरणों में अधिकारियों या आयुक्तों की ओर से दिए गए सुझाव चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, कानूनी अनुपालन और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

जितेंद्र आव्हाड ने भी उठाए सवाल

इसी मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र के ठाणे में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता जितेंद्र आव्हाड ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मामला केवल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग की पूरी कार्यप्रणाली पर चर्चा जरूरी है।

आव्हाड ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले में मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता वाली समिति की व्यवस्था का उल्लेख किया गया था। उन्होंने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने नियुक्ति संबंधी कानून में बदलाव किया था।

आव्हाड ने ज्ञानेश कुमार पर एक राजनीतिक दल के पक्ष में काम करने का आरोप भी लगाया और इसे संविधान तथा डॉ. भीमराव आंबेडकर की संवैधानिक सोच के खिलाफ बताया। ये आरोप उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है। हालिया रिपोर्टों में आव्हाड द्वारा SIR और फॉर्म-6 को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाने तथा ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग का भी उल्लेख है।

SIR को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ा

SIR को लेकर अब विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक और संस्थागत बहस तेज हो गई है। विपक्षी दल मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत की जा रही है और आयोग के निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।ऐसे में मतदाता सूची के पुनरीक्षण, नाम हटाए जाने की प्रक्रिया और आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों को लेकर आगे की कानूनी और राजनीतिक बहस पर नजर बनी हुई है।

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