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UPI शुल्क और स्मार्ट स्कूल योजना पर मायावती ने उठाए सवाल

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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली नई UPI शुल्क व्यवस्था और उत्तर प्रदेश के 14,429 परिषदीय विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल बनाने की योजना को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। मायावती ने कहा कि आम जनता पहले से महंगाई और आर्थिक परेशानियों का सामना कर रही है, ऐसे में ऐसी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए जिससे लोगों पर अतिरिक्त खर्च का दबाव पड़े।

मायावती ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने UPI पर शुल्क व्यवस्था को लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के बाद अब शुल्क लगाने की व्यवस्था से आम लोगों के खर्च पर असर पड़ सकता है।

क्या है नई UPI शुल्क व्यवस्था

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 15 अक्टूबर से लागू होने वाली नई व्यवस्था में सभी UPI लेनदेन पर शुल्क नहीं लगाया जा रहा है। राष्ट्रीय भुगतान निगम के नए प्रावधानों के अनुसार, व्यक्ति से व्यक्ति यानी पी2पी लेनदेन पर शुल्क नहीं लगेगा। वहीं व्यापारी को किए जाने वाले 2,000 रुपये तक के UPI भुगतान भी शुल्क-मुक्त रहेंगे। 2,000 रुपये से अधिक के कुछ व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू होगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के ऐसे लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा।

वित्त मंत्रालय ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि यह शुल्क ग्राहकों पर न डाला जाए। यानी मौजूदा घोषित व्यवस्था के तहत शुल्क व्यापारी पक्ष पर लागू है, सीधे ग्राहक से UPI शुल्क वसूलने का प्रावधान नहीं है।

मायावती ने आम जनता के खर्च का मुद्दा उठाया

मायावती ने अपने बयान में कहा कि UPI के जरिए डिजिटल लेनदेन को पहले बढ़ावा दिया गया और अब शुल्क व्यवस्था लागू की जा रही है। उन्होंने इसे आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाली व्यवस्था बताया।

उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को चाहे किसी भी नाम से लागू किया जाए, इसका असर अंततः आम जनता के खर्च पर पड़ सकता है। मायावती ने देश में गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख करते हुए सरकार की नीतियों को अधिक कल्याणकारी बनाने की जरूरत बताई।

मायावती ने कहा कि सरकार को जनता की आर्थिक परेशानियों और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखकर नीतियां बनानी चाहिए।

स्मार्ट स्कूल योजना पर भी सवाल

मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार की करीब 300 करोड़ रुपये की स्मार्ट स्कूल योजना पर भी सवाल उठाए हैं। राज्य सरकार ने प्रदेश के 14,429 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने की योजना को मंजूरी दी है। योजना के तहत डिजिटल शिक्षा से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

मायावती ने योजना का विरोध करने के बजाय स्कूलों में डिजिटल सुविधाओं से पहले बुनियादी व्यवस्थाओं पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्मार्ट पढ़ाई उपलब्ध कराने से पहले स्कूलों में पर्याप्त छत, बैठने के लिए बेंच-कुर्सियां, किताबें, शौचालय, खेल का मैदान और साफ-सफाई जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए।

प्रति स्कूल खर्च पर भी उठाया सवाल

मायावती ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से 14,429 स्कूलों को स्मार्ट बनाने की योजना में प्रति विद्यालय उपलब्ध होने वाली राशि से क्या सभी जरूरी व्यवस्थाएं पूरी हो पाएंगी।

राज्य सरकार के अनुसार, स्मार्ट स्कूल परियोजना में डिजिटल शिक्षा के लिए इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल, पावर बैकअप, ऑडियो-विजुअल सामग्री, डिजिटल शैक्षणिक सामग्री, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम, वाई-फाई कनेक्टिविटी और अन्य तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। प्रत्येक विद्यालय के लिए करीब 2.07 लाख रुपये की लागत निर्धारित की गई है।

सरकार का उद्देश्य परिषदीय विद्यालयों में डिजिटल माध्यम से पढ़ाई को बढ़ावा देना और विद्यार्थियों को आधुनिक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराना है।

बुनियादी सुविधाओं पर जोर

मायावती ने कहा कि डिजिटल शिक्षा उपयोगी हो सकती है, लेकिन इसके साथ स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता भी जरूरी है। उन्होंने सरकार से स्कूलों की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर भी ध्यान देने की अपील की।

इस तरह UPI शुल्क व्यवस्था और स्मार्ट स्कूल योजना दोनों मुद्दों पर मायावती ने सरकार की नीतियों को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। वहीं UPI के मामले में घोषित नियमों के अनुसार व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान और 2,000 रुपये तक के व्यापारी भुगतान शुल्क-मुक्त रहेंगे, जबकि चुनिंदा 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी लेनदेन पर नया मर्चेंट शुल्क लागू होगा।

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