सवर्ण आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने यूजीसी रेगुलेशन 2026 और SC-ST एक्ट के दुरुपयोग का उठाया मुद्दा; संशोधन की मांग
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के कैसरबाग स्थित गांधी ऑडिटोरियम में ‘संविधान स्वाभिमान सभा’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने शिरकत की। मंच से उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने संविधान संशोधन, यूजीसी रेगुलेशन 2026 और SC-ST एक्ट के कथित दुरुपयोग को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा।
मूल संविधान का हवाला और जातिगत संशोधनों का विरोध
सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि भारत के मूल संविधान में शिक्षा में आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं था। नौकरियों में पिछड़े नागरिकों के लिए व्यवस्था थी, न कि जातियों के आधार पर। इसी तरह अनुसूचित जाति और जनजाति का राजनीतिक आरक्षण केवल 10 वर्षों के लिए तय किया गया था। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 15, 16, 29 और 325 में जाति आधारित भेदभाव पर रोक लगाई गई है, लेकिन समय-समय पर सत्तारूढ़ राजनीतिक दलों ने अपने वोट बैंक के स्वार्थ में संविधान में संशोधन कर इसे जातिगत आधार में बदल दिया।
SC-ST एक्ट और यूजीसी रेगुलेशन पर उठाए सवाल
सवर्ण आर्मी के अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि वर्ष 2016 में SC-ST एक्ट में संशोधन कर अपराधों की संख्या 22 से बढ़ाकर 47 कर दी गई। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने देश को आरक्षित और अनारक्षित दो वर्गों में बांट दिया है। यहां तक कि बेटियों में भी भेदभाव की स्थिति पैदा कर दी गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी सामान्य वर्ग की बेटी के साथ कोई जघन्य अपराध होता है तो उसे वह संरक्षण और न्याय क्यों नहीं मिलता, जो अन्य वर्गों को मिलता है?
उन्होंने ‘यूजीसी रेगुलेशन 2026’ को “काला कानून” करार देते हुए कहा कि इसके तहत सामान्य वर्ग के युवाओं को जन्मजात शोषक घोषित करने का प्रयास किया जा रहा है। यदि सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं के साथ अमानवीय व्यवहार होता है, तो उसे जातीय भेदभाव नहीं माना जाता, जो कि संविधान के समानता के सिद्धांत के विपरीत है।

सभा में रखी गईं प्रमुख मांगें:
- फर्जी मुकदमों पर सख्त कार्रवाई: यदि SC-ST एक्ट के तहत कोई फर्जी मुकदमा दर्ज कराया जाता है, तो निर्दोष पीड़ित को ₹50 लाख का मुआवजा दिया जाए और झूठा केस दर्ज कराने वाले व्यक्ति से ₹50 लाख की वसूली के साथ 10 वर्ष की जेल की सजा का प्रावधान हो।
- यूजीसी रेगुलेशन की वापसी: यूजीसी रेगुलेशन 2026 को पूरी तरह से वापस लिया जाए।
- आरक्षण में सुधार: आरक्षण व्यवस्था में व्यापक सुधार किया जाए ताकि समाज के सभी वर्गों को समानता का अधिकार मिल सके।
सवर्ण समाज को वोट बैंक बनाने का आह्वान
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने सवर्ण समाज से एकजुट होकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की अपील की। सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि जब तक यूजीसी का काला कानून वापस नहीं होता और SC-ST एक्ट के दुरुपयोग पर रोक नहीं लगती, तब तक सवर्ण समाज शांत नहीं बैठेगा। सभा में बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के प्रतिनिधि और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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