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आजमगढ़ में पूजा के बीच खूनी खेल, पत्नी-पुजारियों की हत्या, बेटे को गोली मारकर कमरे में बंद हुआ आरोपी, मुठभेड़ में ढेर

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पुलिस से घिरने के बाद बच्चों को कमरे में बनाया बंधक, समझाने पर भी नहीं माना आरोपी; जवाबी फायरिंग में अरविंद की मौत, बेटा भी उपचार के दौरान मरा

आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में मंगलवार देर शाम पूजा के दौरान हुए विवाद ने खूनी रूप ले लिया। यहां अरविंद सिंह नाम के व्यक्ति ने कथित तौर पर अपनी पत्नी समेत दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी अपने तीन बच्चों को लेकर घर के एक कमरे में बंद हो गया और करीब आठ घंटे तक पुलिस को चुनौती देता रहा। पुलिस ने आरोपी को बच्चों समेत सुरक्षित बाहर निकालने के लिए लगातार समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह आत्मसमर्पण के लिए तैयार नहीं हुआ। इसी दौरान उसने अपने एक बेटे को भी गोली मार दी। पुलिस के कमरे में दाखिल होने पर आरोपी ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। बच्चों की सुरक्षा और आत्मरक्षा में हुई जवाबी फायरिंग में आरोपी गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी और घायल बेटे की मौत हो गई।

पूजा के दौरान हुआ विवाद, फिर बरसी गोलियां

जानकारी के मुताबिक, शंभूपुर गांव में अरविंद सिंह के दिवंगत भाई सुनील सिंह की आत्मा की शांति के लिए पूजा कराई जा रही थी। इसी दौरान किसी बात को लेकर अरविंद नाराज हो गया और विवाद बढ़ गया। आरोप है कि इसके बाद उसने राइफल से गोली चला दी।

गोलीबारी में अरविंद की पत्नी बबिता सिंह (40), पुजारी महेंद्र पाठक (42) और अखिलेश मिश्रा (55) की मौत हो गई। तीनों की मौत मौके पर ही होने की जानकारी सामने आई है।

वारदात के बाद आरोपी ने अपने बच्चों और परिवार के सदस्यों को घर के एक कमरे में अपने साथ बंद कर लिया। उसके पास हथियार होने के कारण पुलिस ने तत्काल पूरे घर को घेर लिया और आसपास का इलाका सुरक्षित कर दिया।

करीब आठ घंटे तक कमरे में कैद रहा आरोपी

पुलिस के पहुंचने के बाद अरविंद को आत्मसमर्पण करने और बच्चों को सुरक्षित बाहर भेजने के लिए लगातार समझाया गया। पुलिस ने उसके परिजनों की मदद से भी बातचीत के जरिए उसे मनाने का प्रयास किया। कमांडो टीम के जरिए बच्चों को सुरक्षित निकालने की तैयारी भी की गई।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी लगातार पुलिस और अपने परिवार के सदस्यों को गोली मारने की धमकी देता रहा। वह बच्चों को भी जान से मारने की धमकी दे रहा था। पुलिस बाहर से उसे दरवाजा खोलने और बच्चों को सुरक्षित बाहर आने देने के लिए समझाती रही, लेकिन वह तैयार नहीं हुआ।

बेटे को गोली मारने के बाद बिगड़ी स्थिति

पुलिस और आरोपी के बीच बातचीत का दौर चल ही रहा था कि कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज आई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपने एक बेटे को गोली मार दी। इसके बाद पुलिसकर्मी तत्काल कमरे के अंदर दाखिल हुए।

पुलिस का दावा है कि कमरे में प्रवेश करते ही अरविंद ने पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने उसे चेतावनी दी और आत्मसमर्पण करने के लिए कहा, लेकिन उसने फायरिंग जारी रखी। बच्चों की जान को खतरा देखते हुए पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की।

जवाबी फायरिंग में अरविंद गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल आरोपी और उसके बेटे को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान दोनों की मौत हो गई।

दो बच्चों को पुलिस ने सुरक्षित निकाला

पुलिस के मुताबिक, कमरे में आरोपी के साथ तीन बच्चे मौजूद थे। कार्रवाई के दौरान दो बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इनमें एक बच्ची के आरोपी के हाथ से नीचे गिरने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस ने बच्चों को सुरक्षित निकालने के बाद घटनास्थल को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।

इस पूरी घटना में आरोपी समेत कुल पांच लोगों की मौत हुई है। मृतकों में अरविंद की पत्नी बबिता सिंह, दो पुजारी महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा, आरोपी का बेटा और आरोपी अरविंद शामिल हैं।

पुलिस ने बताया- बच्चों को बचाने के लिए करनी पड़ी जवाबी कार्रवाई

आजमगढ़ के पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के मुताबिक, घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी। आरोपी तीन बच्चों के साथ कमरे में बंद था। उसे बच्चों समेत सुरक्षित बाहर निकालने और आत्मसमर्पण के लिए लगातार समझाया गया। परिवार के सदस्यों की भी मदद ली गई, लेकिन आरोपी ने किसी की बात नहीं मानी।

एसपी के अनुसार, आरोपी ने पर्याप्त चेतावनी के बावजूद अपने बेटे को गोली मार दी। इसके बाद पुलिस जब कमरे में दाखिल हुई तो उसने पुलिसकर्मियों पर फायरिंग शुरू कर दी। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें आरोपी घायल हुआ और बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

एडीजी ने बताया- कमांडो रेस्क्यू की भी कोशिश हुई

एडीजी नवीन अरोड़ा ने बताया कि पुलिस ने पूरे घटनाक्रम के दौरान संयम बरतते हुए आरोपी को बातचीत के जरिए आत्मसमर्पण कराने का प्रयास किया। कमांडो के जरिए बच्चों को सुरक्षित निकालने की कोशिश भी की गई।

उन्होंने बताया कि बातचीत के लिए एसपी आजमगढ़ की टीम के अंदर जाने के दौरान आरोपी ने अपने बेटे को गोली मार दी। इसके बाद जब पुलिस बच्चों को बचाने के लिए आगे बढ़ी तो आरोपी ने पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। बच्चों की सुरक्षा और आत्मरक्षा में पुलिस ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें आरोपी गंभीर रूप से घायल हुआ। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।

फॉरेंसिक टीम ने शुरू किया साक्ष्य संकलन

घटना के बाद मौके पर पर्याप्त पुलिस बल, एसओजी और फॉरेंसिक टीम तैनात की गई। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। सभी मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने की जानकारी दी गई है।

पुलिस अब वारदात के पीछे की वजह, पूजा के दौरान हुए विवाद की वास्तविक परिस्थितियों और गोलीबारी से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

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