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3.54 लाख रसोइयों का बढ़ा मानदेय, अब हर माह मिलेंगे ₹3,000

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योगी सरकार ने रसोइयों के सम्मान, स्वास्थ्य और वित्तीय सुरक्षा पर दिया जोर, 1.46 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को मिल रहा पौष्टिक भोजन

लखनऊ। विद्यालय की रसोई से बच्चों की थाली तक पहुंचने वाला भोजन केवल आहार नहीं, बल्कि उनके स्वास्थ्य, पोषण और बेहतर भविष्य की आधारशिला है। इसी उद्देश्य के साथ प्रदेश सरकार पीएम पोषण योजना के तहत बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ योजना में कार्यरत रसोइयों के सम्मान, स्वास्थ्य और वित्तीय सुरक्षा को भी मजबूत कर रही है।

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित रसोइयों के सम्मान एवं कैशलेस चिकित्सा कार्ड वितरण समारोह में सरकार की ओर से रसोइयों के कल्याण को लेकर उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा मंत्री ने विभाग की उपलब्धियों और रसोइयों से संबंधित कल्याणकारी योजनाओं को जल्द से जल्द धरातल पर लागू करने के निर्देश दिए।

1.46 करोड़ से अधिक बच्चों को मिल रहा गर्म और पौष्टिक भोजन

पीएम पोषण योजना के तहत प्रदेश के 1.42 लाख प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय आच्छादित हैं। इन विद्यालयों में 1.46 करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं को प्रतिदिन गर्म, ताजा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

योजना के तहत प्राथमिक स्तर के प्रत्येक बच्चे को प्रतिदिन 100 ग्राम खाद्यान्न से 450 कैलोरी ऊर्जा और 12 ग्राम प्रोटीन मिलता है। वहीं उच्च प्राथमिक स्तर पर प्रत्येक बच्चे को 150 ग्राम खाद्यान्न से 700 कैलोरी ऊर्जा और 20 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध कराया जाता है।

राज्य सरकार अपने संसाधनों से सप्ताह में एक दिन बच्चों को ताजे और मौसमी फल भी उपलब्ध कराती है। बुधवार को प्राथमिक स्तर के बच्चों को 150 मिलीलीटर और उच्च प्राथमिक स्तर के बच्चों को 200 मिलीलीटर दूध दिया जाता है। इसके अलावा सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन के तहत चिक्की, गुड़, चना और रामदाना के लड्डू जैसी अतिरिक्त खाद्य सामग्री भी बच्चों को उपलब्ध कराई जाती है। वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 से मार्च 2026 तक प्रत्येक बृहस्पतिवार को यह अतिरिक्त खाद्य सामग्री वितरित की गई।

3.53 लाख रसोइयों को मिलेगा बढ़े मानदेय का लाभ

पीएम पोषण योजना के संचालन में रसोइयों की अहम भूमिका है। योजना में करीब 3.53 लाख रसोइये कार्यरत हैं, जिनमें लगभग 93 प्रतिशत महिलाएं हैं। राज्य सरकार ने रसोइयों के मानदेय में समय-समय पर वृद्धि की है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में 500 रुपये और वर्ष 2022-23 में 500 रुपये की वृद्धि के बाद मानदेय 2,000 रुपये प्रतिमाह हुआ था।

अब वित्तीय वर्ष 2026-27 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मानदेय में 1,000 रुपये की अतिरिक्त वृद्धि का निर्णय लिया है। इसके बाद रसोइयों को 3,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। इसके साथ ही वर्ष में एक बार दो ड्रेस के लिए 500 रुपये की धनराशि भी सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जा रही है।

किचन गार्डेन से बढ़ेगा बच्चों के भोजन का पोषण

बच्चों को प्रकृति से जोड़ने और उनके भोजन में पौष्टिकता बढ़ाने के उद्देश्य से विद्यालयों में किचन गार्डेन विकसित किए गए हैं। जिन विद्यालयों में पर्याप्त स्थान उपलब्ध है, उन्हें किचन गार्डेन के लिए 5,000 रुपये और स्थलाभाव वाले विद्यालयों को 2,000 रुपये की धनराशि दी गई है।

इन किचन गार्डेन में उगाई जाने वाली फल और सब्जियों का उपयोग बच्चों के भोजन में अतिरिक्त पोषण के तौर पर किया जाता है। इससे बच्चों को ताजी सब्जियां और फल उपलब्ध कराने के साथ उनमें प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

25 जिलों में 136 केंद्रीयकृत रसोईघर संचालित

प्रदेश के 25 जनपदों में 136 केंद्रीयकृत रसोईघर संचालित किए जा रहे हैं। अक्षयपात्र फाउंडेशन और 127 स्वैच्छिक संस्थाओं के माध्यम से करीब 10 लाख बच्चों तक गर्म और ताजा भोजन पहुंचाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री द्वारा जुलाई 2022 में वाराणसी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जून 2026 में गोरखपुर में अक्षयपात्र फाउंडेशन के केंद्रीयकृत किचन का उद्घाटन/शुभारंभ किया गया।

सोशल ऑडिट और आईवीआरएस से निगरानी

पीएम पोषण योजना में पारदर्शिता और भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित सोशल ऑडिट कराया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 2,885 विद्यालयों में सोशल ऑडिट कराया गया। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 2,838 विद्यालयों में सोशल ऑडिट कराने का लक्ष्य रखा गया है।

योजना की निगरानी के लिए जिलाधिकारी और उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जनपद एवं ब्लॉक स्तरीय टास्क फोर्स गठित की गई है। इसके साथ ही आईवीआरएस आधारित दैनिक अनुश्रवण प्रणाली के माध्यम से योजना के संचालन और भोजन वितरण की नियमित निगरानी की जा रही है।

सरकार का जोर बच्चों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के साथ योजना को संचालित करने वाले रसोइयों को बेहतर आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देने पर है। मानदेय में बढ़ोतरी और अन्य कल्याणकारी कदमों से प्रदेश के हजारों रसोइयों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।

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