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लखनऊ पहुंचे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, युवाओं से बोले- लोकतंत्र के भविष्य में निवेश है सजग मतदाता भागीदारी

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ईएलसी 2.0 के जरिए स्कूल-कॉलेजों में बढ़ेगी चुनावी साक्षरता, सीईसी ने छात्रों को फेक न्यूज से सतर्क रहने और 18 वर्ष की उम्र पर मतदाता बनने की दी सलाह

लखनऊ। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार सोमवार को दो दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंचे। उन्होंने ऐतिहासिक कॉल्विन तालुकेदार्स कॉलेज के अवध हॉल में छात्रों के साथ संवाद किया। इसके बाद भारत निर्वाचन आयोग की ओर से आयोजित निर्वाचक साक्षरता क्लब (ईएलसी) और क्षेत्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों से आए विद्यार्थी और शिक्षक शामिल हुए।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि लोकतंत्र को समृद्ध और मजबूत बनाने के लिए निर्वाचक साक्षरता क्लब बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि भारत में संविधान और कानून के प्रावधानों के अनुसार निर्वाचन प्रक्रिया पूरी कराई जाती है। चुनाव के प्रत्येक चरण में राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की भागीदारी के साथ पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है।

उन्होंने युवाओं को निर्वाचन प्रक्रिया से जोड़ने पर जोर देते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में युवाओं का विश्वास और उनकी सजग भागीदारी लोकतंत्र के भविष्य में निवेश है। उन्होंने बताया कि ईएलसी 2.0 के तहत निर्वाचक साक्षरता क्लबों को स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में व्यवस्थित, दृश्यमान और डिजिटल रूप से सक्षम प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जाएगा।

ज्ञानेश कुमार के मुताबिक इस पहल के तहत पूरे वर्ष चुनावी साक्षरता और जागरूकता से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इसका उद्देश्य युवा नागरिकों के साथ-साथ उनके परिवारों, शैक्षणिक संस्थानों और समुदायों में चुनावी जागरूकता बढ़ाना है।

उन्होंने बताया कि देश में करीब 15 लाख स्कूल हैं, जिनमें लगभग 25 करोड़ छात्र और एक करोड़ से अधिक शिक्षक हैं। वहीं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में करीब 1,500 विश्वविद्यालय और लगभग 70 हजार शिक्षण संस्थान हैं, जिनमें करीब 4.33 करोड़ छात्र अध्ययनरत हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरा नेटवर्क चुनावी साक्षरता को व्यापक स्तर पर बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

छात्रों से संवाद में ईवीएम और फेक न्यूज पर चर्चा

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने अपने लखनऊ दौरे के दौरान छात्रों से सीधे संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अपने छात्र जीवन की स्मृतियां साझा कीं और भारतीय लोकतंत्र, निर्वाचन प्रक्रिया, ईवीएम की विश्वसनीयता तथा युवा मतदाताओं की भूमिका पर चर्चा की।

भारत की विशाल निर्वाचन व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश में करीब 100 करोड़ मतदाता हैं और इतनी बड़ी आबादी के लिए चुनाव कराना अपने आप में बहुत बड़ा कार्य है। उन्होंने बताया कि निर्वाचन प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराने में बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।

ईवीएम से जुड़े सवालों पर ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भारतीय ईवीएम सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा निर्मित की जाती हैं और इंटरनेट, ब्लूटूथ या वाई-फाई से जुड़ी नहीं होती हैं। उन्होंने छात्रों से सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली भ्रामक सूचनाओं और फेक न्यूज से सतर्क रहने की अपील की।

उन्होंने कहा कि किसी भी सूचना पर विश्वास करने से पहले उसके स्रोत और उसकी सत्यता की जांच करना जरूरी है। युवाओं को जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने के लिए तथ्यों की पुष्टि करने की आदत विकसित करनी चाहिए।

18 साल की उम्र पूरी होते ही मतदाता बनने की अपील

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने युवाओं से लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 326 का उल्लेख करते हुए 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले विद्यार्थियों से अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने की अपील की।

उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के डिजिटल माध्यमों के जरिए मतदाता पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है। युवाओं को स्वयं मतदाता बनने के साथ ही अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी मतदान के लिए प्रेरित करना चाहिए।संवाद कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र से जुड़े विभिन्न सवाल मुख्य निर्वाचन आयुक्त के सामने रखे। ज्ञानेश कुमार ने छात्रों के सवालों का विस्तार से जवाब दिया।कार्यक्रम में जिलाधिकारी विशाल, कॉलेज के प्रधानाचार्य, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे

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