अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की राम जन्मभूमि परिसर में सोमवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा का त्यागपत्र स्वीकार कर लिया गया। साथ ही ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन को कार्यकारी महासचिव नियुक्त किया गया। श्रद्धालुओं की भावनाओं को देखते हुए ट्रस्ट ने अब तक की भेंट, दान और चढ़ाव की धनराशि को सार्वजनिक करते हुए कहा कि कोई भी दानकर्ता यहां आकर अपनी भेंट या दान का सत्यापन कर सकता है।
ट्रस्ट की बैठक में सदस्यों का कोरम पूरा हुआ
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरि महाराज ने बैठक में लिये गए फैसलों की मीडिया को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की बैठक में सदस्यों का कोरम पूरा हुआ और इस बैठक में ट्रस्ट के सदस्य के. पारासरन आभासी रूप से जुड़े। बैठक में मंदिर के दान में चोरी की घटना को अत्यंत दुर्भाग्य और आहत करने वाली बताया गया। बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय और ट्रस्टी डॉ अनिल मिश्र द्वारा नैतिक रूप से अपने अपने पदों से दिए गए त्यागपत्र पर ट्रस्ट के नियमों के अनुरूप चर्चा की गयी।
कोई सदस्य त्यागपत्र देता है तो त्यागपत्र स्वीकार हो जाएगा
बैठक के दौरान सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं ट्रस्टी के. पारासरन ने सदस्यों को बताया कि ट्रस्ट का नियम है कि अगर कोई सदस्य त्यागपत्र देता है तो त्यागपत्र स्वीकार हो जाएगा। ऐसे में नैतिक आधार पर महामंत्री चम्पत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्र का त्यागपत्र स्वीकार कर लिया गया है। साथ ही ट्रस्टी कृष्ण मोहन को कार्यकारी महासचिव नियुक्त किया गया है। इनकी मदद के लिए एक समिति भी गठित की गयी। इसके अलावा गोपाल नगरकोटे का नाम विशिष्ट आमंत्रित सदस्य सूची से हटा दिया गया है।
22 जुलाई को होगी ट्रस्ट की पुन: बैठक
गोविंद देव गिरि ने बताया कि 22 जुलाई को ट्रस्ट की पुन: बैठक होगी। बैठक में ट्रस्ट के नए सदस्यों की नियुक्ति पर विचार किया जाएगा। तब तक एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट आ जाएगी। दान चोरी करने वाले अन्य अपराधियों के खिलाफ भी कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए दान की गयी 2800 वस्तुतों की सूची बनी है और अगर किसी भी दानदाता के मन में संशय है तो वे ट्रस्ट के अयोध्या कार्यालय आकर देख सकते हैं। सभी वस्तुओं को पूरी तरह से सुरक्षित रखा गया है।
श्रद्धालुओं का विश्वास पुन: स्थापित करेगा ट्रस्ट
बड़े ही भावुक हाेते हुए गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि मंदिर चोरी के प्रकरण को लेकर अनर्गल बातें मीडिया में आने और कुछ राजनीतिक दलों की ओर से इस मुद्दे पर जो चिंता दिखायी जा रही है वे राष्ट्र के लिए घातक हैं, क्योंकि यही वे राजनीतिक दल और नेता हैं जो भगवान राम को काल्पनिक बता कर न्यायालय तक गए। मंदिर आंदोलन के समय कारसेवकों पर गोलियां तक चलवाईं। ऐसे नेताओं एवं संगठनों का मकसद राजनीतिक रोटियां सेंकना और हिंदू एकता, रामभक्तों और सनातन पर चोट करना है, लेकिन ट्रस्ट आह्र्वान करता है कि सभी हिंदू समाज की अपेक्षा के अनुरूप काम करेगा और उनका विश्वास पुन:स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि राम भक्त धैर्य रखें और किसी प्रकार के अनर्गल समाचारों पर ध्यान न दें।
चोरी करने वालों को दंड दिलाना प्राथमिकता
बैठक में कार्यकारी महासचिव कृष्ण मोहन ने अपनी प्राथमिकताएं गिनाते हुए कहा कि पहला काम चढ़ावा चोरी करने वाले अपराधियों को दंड दिलाना और मंदिर प्रबंधन में अब तक रहीं कमियां दूर करना है। ट्रस्ट के सदस्य समाज में राम मंदिर की पुन: प्रतिष्ठा और विश्वास बनाएंगे।
सार्वजनिक की गई धनराशि
ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि आज की बैठक में प्रमुख रूप से दानपात्रों से प्राप्त राशि की गणना की प्रक्रिया में अनियमितता, उसकी जांच और कार्यवाही, महामंत्री और एक न्यासी के न्यासी पद से त्यागपत्रों, मीडिया में चल रही चर्चाओं, भावी अन्तरिम व्यवस्थाओं आदि विषयों पर विचार हुआ। अब तक निधि समर्पण अभियान एवं कॉर्पस दान के माध्यम से प्राप्त कुल राशि 3,264 करोड़ रुपये में से 2,370 करोड़ रुपये निर्माण एवं पूंजीगत व्यय में उपयोग की गई है।
2026 तक कुल चढ़ावा 582 करोड़ रुपये प्राप्त हुआ
प्रारम्भ से लेकर 31 मार्च 2026 तक कुल चढ़ावा 582 करोड़ रुपये प्राप्त हुआ, जिसमें से 391 करोड़ रुपये की राशि संचालन व्यय में उपयोग ली गई। शेष राशियां बैंक खातों में उपलब्ध है। ये समस्त वितीय सूचनाएं समय—समय पर ट्रस्ट ने मीडिया के समक्ष प्रस्तुत की हैं। नकद राशि के अतिरिक्त अनेक श्रद्धालुओं ने वस्तु के रूप में प्रभु श्री रामलला को भेंट अर्पित की हैं। ऐसी कुल 2,926 भेंट प्राप्त हुई हैं जो समस्त, तिथि अनुसार, सम्पूर्ण विवरण के साथ रजिस्टर में दर्ज हैं और उनका भौतिक सत्यापन एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट फ़र्म द्वारा आंतरिक अंकेक्षक के नाते प्रति वर्ष किया जाता है। काउंटर पर ऐसी भेंट देने वाले समस्त श्रद्धालुओं को रशीद दी गई हैं और काउंटर के अतिरिक्त दी गई भेंट हेतु भी उन समस्त श्रद्धालुओं को रशीद दी गई है जिन्होने दानदाता का विवरण दिया।
कुल वजन के टकसाल के प्रमाण-पत्र भी उपलब्ध
समस्त श्रद्धालुओं से निवेदन है कि जो भी अपनी दी हुई भेंट का उपयोग जानना अथवा सत्यापन करना चाहें, वे कभी भी ट्रस्ट के अधिकारी से तिथि व समय निश्चित कर अयोध्या पधारें और प्रभु श्री रामलला के दर्शन के साथ अपनी भेंट का सत्यापन कर सकते हैं। चांदी की वस्तुओं को भारत सरकार की टकसाल (मिंट) में गला कर छड़ें बनाई गई हैं जिनके मूल स्वरूप का विवरण फोटो व वजन सहित उपलब्ध है। गलाने के पश्चात चाँदी की शुद्धता और कुल वजन के टकसाल के प्रमाण-पत्र भी उपलब्ध हैं।
भारतीय वन सेवा (आईएफएस) से सेवानिवृत्त हैं कृष्ण मोहन
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को श्री राम जन्मभूमि परिसर में हुई बैठक में ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है। अब वे ट्रस्ट के प्रशासनिक और संगठनात्मक कार्यों का दायित्व संभालेंगे। उन्हें ट्रस्ट का अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है। अब वे ट्रस्ट के प्रशासनिक और संगठनात्मक कार्यों का दायित्व संभालेंगे। कृष्ण मोहन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संघचालक के दायित्व पर अपनी सेवा दे रहे हैं।
उन्होंने महाराष्ट्र कैडर में लंबे समय तक सेवाएं दीं
कृष्ण मोहन ने 1970 के दशक में लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उनका चयन भारतीय वन सेवा (आईएफएस) में हुआ और उन्होंने महाराष्ट्र कैडर में लंबे समय तक सेवाएं दीं। सेवानिवृत्ति के बाद वे सामाजिक और जनसेवा के कार्यों से जुड़े रहे।
कृष्ण मोहन का जन्म सितंबर 1952 में बरेली में हुआ
कृष्ण मोहन का जन्म सितंबर 1952 में बरेली में हुआ। उनके पिता रेलवे में अधिकारी थे। मूल रूप से हरदोई जिले के शाहाबाद क्षेत्र के सिकंदरपुर बाजार निवासी कृष्ण मोहन ने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद करीब पांच वर्ष तक एटॉमिक एनर्जी विभाग में वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया। बाद में उनका चयन भारतीय वन सेवा में हुआ और महाराष्ट्र कैडर मिला। वर्ष 2012 में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए।
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