INDIA की बैठक में मतभेदों की गूंज? दिल्ली में जुटे विपक्षी दलों के बीच दिखी सियासी हलचल
2029 की रणनीति पर मंथन

नई दिल्ली। दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में सोमवार को हुई INDIA गठबंधन की बैठक ने जितनी चर्चा विपक्षी एकता को लेकर बटोरी, उतनी ही सुर्खियां सहयोगी दलों के बीच उभरते मतभेदों ने भी बटोरीं। एक ओर भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति बनाने का दावा किया गया, तो दूसरी ओर मंच पर मौजूद नेताओं के बयानों ने गठबंधन के भीतर की खींचतान को भी उजागर कर दिया।
बैठक से पहले ही राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि क्या INDIA गठबंधन अपने सहयोगी दलों को एकजुट रख पाएगा। इस चर्चा को उस समय और बल मिला जब गठबंधन के कुछ प्रमुख सहयोगी दलों ने बैठक से दूरी बना ली। इससे विपक्षी एकता के दावों पर सवाल उठने लगे।
बैठक में शामिल नेताओं ने महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और केंद्र सरकार की नीतियों को प्रमुख मुद्दा बनाया। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद Supriya Sule ने कहा कि देश आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है और विपक्ष का दायित्व है कि वह जनता की समस्याओं को मजबूती से उठाए।
वहीं कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने अपने संबोधन में महंगाई, विदेश नीति और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने विपक्षी दलों से लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के लिए एकजुट रहने की अपील की।
लेकिन बैठक की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा के खिलाफ एक मंच पर खड़े दलों के कुछ नेताओं ने कांग्रेस को भी नसीहत देने में कोई संकोच नहीं किया। सीपीआई सांसद P. Sandosh Kumar ने साफ कहा कि गठबंधन को मजबूत बनाए रखने के लिए कांग्रेस को ज्यादा जिम्मेदारी और राजनीतिक समझदारी दिखानी होगी। उनके इस बयान ने बैठक के भीतर चल रही सियासी हलचलों को सार्वजनिक कर दिया।
उधर, Sharad Pawar ने सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी दल को अपनी बात पर अड़ियल रवैया नहीं अपनाना चाहिए। उनके बयान को गठबंधन के भीतर संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
इस बीच भाजपा ने भी बैठक पर तंज कसने का मौका नहीं छोड़ा। भाजपा सांसद Sanjay Jaiswal ने दावा किया कि INDIA गठबंधन अब केवल बैठकों तक सीमित रह गया है और इसकी राजनीतिक ताकत लगातार घट रही है।
दिलचस्प बात यह भी रही कि जहां बैठक के भीतर विपक्षी दल एकजुटता की तस्वीर पेश करने की कोशिश कर रहे थे, वहीं बाहर राजनीतिक विश्लेषक गठबंधन के भविष्य को लेकर अलग-अलग आकलन कर रहे थे। कुछ इसे 2029 की तैयारी का शुरुआती खाका मान रहे हैं, तो कुछ इसे सहयोगी दलों के बीच बढ़ती दूरी को पाटने का प्रयास बता रहे हैं।
फिलहाल इतना तय है कि दिल्ली में हुई यह बैठक केवल औपचारिक राजनीतिक आयोजन नहीं रही। इसने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या INDIA गठबंधन अपने अंदरूनी मतभेदों को पीछे छोड़कर भाजपा के खिलाफ एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प बन पाएगा, या फिर सहयोगी दलों के बीच उभर रहे मतभेद भविष्य की राजनीति को नई दिशा देंगे।
यह भी पढ़े : आर प्रज्ञानंद ने रचा इतिहास, नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट जीतने वाले पहले भारतीय बने
यह भी पढ़े : दिल्ली में मौत का तांडव, रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग, 21 जिंदगियां राख
यह भी पढ़े : यूपी में स्मार्ट मीटर पर बड़ा फैसला, उपभोक्ता खुद तय करेंगे प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर




