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मुख्यमंत्री के निर्देशों का संघर्ष समिति ने किया स्वागत, आउटसोर्स कर्मियों को यूपीकोस के अधीन लाने की मांग

लखनऊ । विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उत्तर प्रदेश कॉर्पोरेशन फॉर आउटसोर्स्ड सर्विसेज (UPCOS) की समीक्षा बैठक में दिए गए उस महत्वपूर्ण वक्तव्य का स्वागत किया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था को तकनीक आधारित, जवाबदेह, पारदर्शी तथा कर्मचारी हितैषी बनाया जाए तथा कर्मचारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

आउटसोर्स संविदा कर्मियों को बड़ी संख्या में हटाया जा रहा

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि एक ओर मुख्यमंत्री आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों की रक्षा, पारदर्शी नियुक्ति व्यवस्था, एकरूप सेवा शर्तों तथा जवाबदेह प्रशासनिक तंत्र के लिए लगातार प्रयासरत हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ऊर्जा निगमों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को यूपीकोस के दायरे में लाने में लगातार बाधाएं उत्पन्न कर रहा है। इतना ही नहीं तो आउटसोर्स संविदा कर्मियों को बड़ी संख्या में हटाया जा रहा है।

ऊर्जा निगमों में इस नीति को लागू करने में विलंब क्यों

संघर्ष समिति ने कहा कि दिसंबर 2024 में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन द्वारा शासन को पत्र भेजकर ऊर्जा निगमों के आउटसोर्स कर्मचारियों को यूपीकोस से अलग रखने का अनुरोध किया गया था, जिसे अप्रैल 2025 में शासन स्तर पर अस्वीकार कर दिया गया। इसके बावजूद आज तक ऊर्जा निगमों के आउटसोर्स कर्मचारियों को यूपीकोस व्यवस्था में सम्मिलित नहीं किया गया है। इससे यह प्रश्न उठता है कि जब प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री जी आउटसोर्स व्यवस्था को पारदर्शी एवं कर्मचारी हितैषी बनाना चाहते हैं, तब ऊर्जा निगमों में इस नीति को लागू करने में विलंब क्यों किया जा रहा है।

बिजली व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा

संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि प्रदेश के माननीय ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा तथा वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा हटाए गए आउटसोर्स एवं संविदा कर्मियों को सेवा में वापस लेने के निर्देश दिए जाने के बावजूद 25,000 से अधिक संविदा कर्मियों को अब तक कार्य पर वापस नहीं लिया गया है। इससे बिजली व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है तथा लाखों उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत सेवा उपलब्ध कराने में कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं हस्तक्षेप कर पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को निर्देशित करें कि ऊर्जा निगमों में कार्यरत सभी आउटसोर्स संविदा कर्मचारियों को तत्काल बहाल किया जय और यूपीकोस के अधीन लाया जाए तथा आउटसोर्स एवं संविदा कर्मचारियों के प्रति वही जवाबदेह, पारदर्शी और कर्मचारी हितैषी दृष्टिकोण अपनाया जाए जिसकी अपेक्षा मुख्यमंत्री ने व्यक्त की है।

बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक

संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को अपनी हठधर्मिता छोड़ते हुए यह स्वीकार करना चाहिए कि 25,000 से अधिक संविदा आउटसोर्स कर्मियों को हटाए जाने के बाद प्रदेश की विद्युत व्यवस्था विशेषकर ग्रीष्मकालीन अवधि में गंभीर दबाव में आ गई है। बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है और आगामी दिनों में प्रदेश की विद्युत मांग 36,000 मेगावाट तक पहुंचने की संभावना है। ऐसी परिस्थितियों में अनुभवी आउटसोर्स एवं संविदा कर्मियों की सेवाएं बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

आउटसोर्स कर्मियों को तत्काल सेवा में वापस लिया जाए

संघर्ष समिति ने मांग की है कि सभी हटाए गए संविदा एवं आउटसोर्स कर्मियों को तत्काल सेवा में वापस लिया जाए तथा मार्च 2023 से अब तक विभिन्न आंदोलनों के दौरान बिजली कर्मियों एवं पदाधिकारियों के विरुद्ध की गई सभी उत्पीड़नात्मक, अनुशासनात्मक एवं दंडात्मक कार्यवाहियों को वापस लिया जाए। संघर्ष समिति का मानना है कि संवाद, विश्वास, कर्मचारी हितों की सुरक्षा तथा जवाबदेह प्रशासनिक व्यवस्था के माध्यम से ही प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।

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