लखनऊ । राजधानी स्थित पीएसी मुख्यालय में 48वें आईपीएस इंडक्शन प्रशिक्षण कोर्स के अंतर्गत स्टडी कम कल्चरल टूर (SCCT) पर आए अधिकारियों के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर-पूर्वी राज्यों से आए आईपीएस अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली, आपदा प्रबंधन व्यवस्था और पीएसी की विभिन्न गतिविधियों की विस्तृत जानकारी हासिल की।कार्यक्रम की शुरुआत अधिकारियों द्वारा अपर पुलिस महानिदेशक पीएसी डा. रामकृष्ण स्वर्णकार से शिष्टाचार भेंट के साथ हुई। मुलाकात के दौरान अधिकारियों ने पीएसी की कार्यशैली, आधुनिक संसाधनों और विभिन्न आपात परिस्थितियों में उसकी भूमिका को लेकर चर्चा की।

मुख्यालय सभागार में एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण आयोजित किया गया

इसके बाद पीएसी मुख्यालय सभागार में एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण आयोजित किया गया। प्रस्तुतीकरण में अधिकारियों को प्रांतीय सशस्त्र बल (PAC), बाढ़ राहत दलों, एसडीआरएफ और विभिन्न विशेष इकाइयों के संगठनात्मक ढांचे, जिम्मेदारियों और उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।अधिकारियों को बताया गया कि प्राकृतिक आपदाओं, बाढ़, राहत एवं बचाव अभियानों और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पीएसी किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके अलावा एसडीआरएफ की त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली, राहत कार्यों में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षण व्यवस्थाओं की भी जानकारी साझा की गई।प्रस्तुतीकरण के दौरान पुलिस मॉडर्न स्कूल की व्यवस्थाओं और पुलिसकर्मियों के बच्चों को दी जाने वाली सुविधाओं पर भी चर्चा हुई।

अधिकारियों ने पीएसी की कार्यप्रणाली व प्रशिक्षण मॉडल में विशेष रुचि दिखाई

साथ ही आगामी द्वितीय अखिल भारतीय पुलिस बैडमिंटन क्लस्टर प्रतियोगिता 2025-26 की तैयारियों और आयोजन व्यवस्था से भी अधिकारियों को अवगत कराया गया।कार्यक्रम में अधिकारियों ने पीएसी की कार्यप्रणाली और प्रशिक्षण मॉडल में विशेष रुचि दिखाई। कई अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश में आपदा प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल पूछे, जिनका विस्तार से उत्तर दिया गया।इस अवसर पर प्रीतिन्दर सिंह सहित पीएसी के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न राज्यों से आए आईपीएस अधिकारियों को उत्तर प्रदेश पुलिस और पीएसी की कार्यशैली से परिचित कराना था, ताकि राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और अनुभवों का आदान-प्रदान हो सके।

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