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पलक झपकते ढही चार मंजिला इमारत, कैंटीन और कोचिंग सेंटर मलबे में दबे, रातभर चला रेस्क्यू

नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के साकेत इलाके में शनिवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सैदुल्लाजाब की एक चार मंजिला व्यावसायिक इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। देखते ही देखते पूरी इमारत कंक्रीट, सरियों और मलबे के विशाल ढेर में तब्दील हो गई। हादसे के वक्त आसपास मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। इमारत के गिरते ही पूरे इलाके में धूल का घना गुबार छा गया और चीख-पुकार मच गई।

कैंटीन और कोचिंग सेंटर के हिस्से पर भी जा गिरा

इमारत का भारी मलबा पास में स्थित कैंटीन और कोचिंग सेंटर के हिस्से पर भी जा गिरा। उस समय कई छात्र वहां मौजूद थे, जिससे लोगों के फंसे होने की आशंका पैदा हो गई। घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, एनडीआरएफ और अन्य आपदा राहत एजेंसियां मौके पर पहुंच गईं और युद्धस्तर पर बचाव अभियान शुरू किया गया।

कुछ ही सेकंड में जमींदोज हुई इमारत

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शाम के समय अचानक तेज आवाज सुनाई दी और पूरी इमारत एक के बाद एक मंजिल टूटते हुए नीचे आ गिरी। लोगों ने बताया कि पहले इमारत में कंपन महसूस हुआ और फिर कुछ ही सेकंड में पूरा ढांचा धराशायी हो गया।हादसे के बाद सड़क पर धूल का इतना घना गुबार छा गया कि कुछ देर तक आसपास कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। धूल छंटने के बाद लोगों को हादसे की भयावहता का अंदाजा हुआ।

छात्रों पर टूटा कहर

इमारत से सटे परिसर में संचालित कैंटीन में कई छात्र भोजन कर रहे थे। अचानक इमारत गिरने से कैंटीन का हिस्सा भी मलबे की चपेट में आ गया। वहीं भूतल पर संचालित कोचिंग संस्थान के कारण भी चिंता बढ़ गई, क्योंकि वहां भी छात्रों की आवाजाही रहती थी।स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू किया। कई युवाओं ने अपने हाथों से मलबा हटाना शुरू कर दिया और कुछ घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। बाद में पहुंची राहत एजेंसियों ने अभियान को और तेज किया।

11 लोगों को सुरक्षित निकाला गया

राहत एवं बचाव अभियान के दौरान अब तक 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। घायलों को तत्काल अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। प्रशासन को आशंका थी कि मलबे के नीचे अन्य लोग भी फंसे हो सकते हैं, जिसके चलते देर रात तक सर्च ऑपरेशन जारी रहा।पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए कई मार्गों पर विशेष यातायात व्यवस्था भी लागू की, ताकि एंबुलेंस बिना किसी बाधा के अस्पताल तक पहुंच सकें।

आधुनिक उपकरणों से चला रेस्क्यू ऑपरेशन

मलबे के विशाल ढेर को हटाने के लिए जेसीबी मशीनों, हाइड्रोलिक कटर, जैक और विशेष ड्रिलिंग उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। बचाव दल ने ऐसे उपकरणों की मदद ली जो मलबे के भीतर फंसे लोगों का पता लगाने में सक्षम होते हैं।एनडीआरएफ और दमकल विभाग के जवान बेहद सावधानी से मलबा हटाते रहे, ताकि यदि कोई व्यक्ति जीवित फंसा हो तो उसे सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

परिजनों की बढ़ी चिंता

हादसे के बाद अस्पतालों और घटनास्थल पर अपने परिजनों की तलाश में पहुंचे लोगों की भीड़ लग गई। कई परिवार अपने बच्चों और रिश्तेदारों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए घंटों परेशान रहे। अस्पतालों में घायलों की पहचान और उनके परिजनों से संपर्क कराने का कार्य लगातार चलता रहा।

निर्माण कार्य पर उठे सवाल

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इमारत की ऊपरी मंजिल पर निर्माण कार्य चल रहा था। हादसे के बाद प्रशासन ने भवन की संरचनात्मक मजबूती, निर्माण गुणवत्ता और स्वीकृतियों की जांच शुरू कर दी है।अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जाएगा कि भवन निर्माण और विस्तार कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप किया गया था या नहीं। जांच के आधार पर भवन मालिक और संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

टला बड़ा हादसा

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि यह हादसा कार्यदिवस के दौरान या दिन के व्यस्त समय में हुआ होता तो जनहानि कहीं अधिक हो सकती थी। इमारत में कई कार्यालय और व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित होने के कारण सामान्य दिनों में यहां बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना रहता था।फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान राहत और बचाव कार्य पर केंद्रित है। देर रात तक एजेंसियां मलबे में संभावित रूप से फंसे लोगों की तलाश में जुटी रहीं और पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया।

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