लखनऊ । उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण और कर्मचारियों पर कथित उत्पीड़न के विरोध में चल रहा आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज मुजफ्फरनगर और मेरठ में बिजली कर्मियों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। इसके साथ ही प्रदेश के अन्य जनपदों में भी विरोध कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहा।
उपभोक्ताओं पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा
संघर्ष समिति द्वारा चलाए जा रहे प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान के तहत बिजली कर्मचारी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के प्रस्तावित निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यह निर्णय न केवल बिजली क्षेत्र के लिए नुकसानदायक है, बल्कि उपभोक्ताओं पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा।
506 दिनों से जारी आंदोलन
संघर्ष समिति के अनुसार, यह आंदोलन पिछले 506 दिनों से जारी है। इस दौरान कर्मचारियों द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन, जन-जागरण और विरोध सभाओं के माध्यम से सरकार और पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन तक अपनी मांगें पहुंचाई जा रही हैं।कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में मार्च 2023 से आंदोलन के दौरान की गई कथित उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को वापस लेना और निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल रोकना शामिल है।
“उत्पीड़न और तबादलों से बढ़ रहा असंतोष”
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि आंदोलन के बावजूद बिजली कर्मियों पर कार्रवाई जारी है। अनुभवी आउटसोर्स और संविदा कर्मियों को सेवा से हटाने और नियमित कर्मचारियों के दूरस्थ स्थानों पर तबादले किए जाने का भी विरोध किया गया है।उनका कहना है कि इससे बिजली व्यवस्था पर सीधा असर पड़ सकता है और भविष्य में उपभोक्ताओं को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
प्रबंधन से वार्ता की मांग
संघर्ष समिति ने पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन से तत्काल वार्ता शुरू करने की मांग की है। साथ ही सभी कथित उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस लेने और हटाए गए संविदा कर्मियों को पुनः बहाल करने की अपील की गई है।
सभाओं में नेताओं ने उठाई आवाज
मुजफ्फरनगर और मेरठ में आयोजित सभाओं को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों जितेंद्र सिंह गुर्जर, मोहम्मद वसीम और निखिल कुमार ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध के बावजूद कर्मचारियों का उत्पीड़न जारी रहना दुर्भाग्यपूर्ण है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऊर्जा मंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों के बावजूद मार्च 2023 की सांकेतिक हड़ताल के दौरान की गई कार्यवाहियां अब तक वापस नहीं ली गई हैं, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी और बढ़ गई है।
चेतावनी भी दी गई
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही वार्ता कर समाधान नहीं निकाला गया और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त नहीं हुईं, तो आने वाली गर्मियों में बिजली व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से प्रबंधन की होगी।
उपभोक्ताओं को लेकर भी दावा
संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि प्रदेश में कई जगह उपभोक्ता असंतोष के चलते विद्युत कार्यालयों का घेराव कर रहे हैं और कुछ स्थानों पर तनावपूर्ण स्थिति भी बनी है। संगठन का दावा है कि यह स्थिति प्रबंधन की नीतिगत विफलता का परिणाम है।
आंदोलन जारी रहेगा
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि प्रदेशभर में जन-जागरण अभियान जारी रहेगा और जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे।
