लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिकों के लिए श्रम कानूनों को सरल और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में चार नई श्रम संहिताओं को लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है, जिनके तहत 29 पुराने कानूनों को समाप्त कर एकीकृत व्यवस्था लागू की जाएगी।
कम से कम 50% हिस्सा बेसिक वेतन होगा
नई व्यवस्था के तहत वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता 2020 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 को लागू किया जाएगा। इसमें सबसे बड़ा बदलाव वेतन की परिभाषा में किया गया है, जिसके अनुसार कर्मचारी के कुल वेतन (CTC) का कम से कम 50% हिस्सा बेसिक वेतन होगा। इससे PF, ग्रेच्युटी और बोनस में बढ़ोतरी होगी।नई संहिताओं में सभी क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन अनिवार्य किया गया है। वेतन का भुगतान हर महीने 7 तारीख तक करना होगा और ओवरटाइम पर दोगुना भुगतान मिलेगा। समान काम के लिए समान वेतन सुनिश्चित किया जाएगा।
छंटनी या बंदी के लिए सरकारी अनुमति लेनी होगी
इसके अलावा, 300 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों को ही छंटनी या बंदी के लिए सरकारी अनुमति लेनी होगी। गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी पहली बार सामाजिक सुरक्षा के दायरे में शामिल किया गया है।सरकार ने इन नियमों का मसौदा सार्वजनिक कर हितधारकों से सुझाव मांगे हैं और मई तक अंतिम अधिसूचना जारी होने की संभावना है। नई व्यवस्था से श्रमिकों को अधिक सुरक्षा और एमएसएमई सेक्टर को राहत मिलने की उम्मीद है।
